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सरकार ने नहीं सुनी तो खुद ही बना लिया रास्ता

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सरकार ने नहीं सुनी तो खुद ही बना लिया रास्ता
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भैंसी नदी पर दस वर्ष से टूटी है पुलिया
पानी नहीं होने के कारण पुलिया के पास से बना लिया रास्ता
नेता, अधिकारी किसी ने नहीं सुनी गांव बेला, मदारपुर, चंदुआपुर के लोगों की व्यथा
फोटो-26-गांव बेला, मदारपुर के पास भैंसी नदी पर बनी जर्जर पुलिया
फोटो-27-पुलिया के पास से रास्ता बनाते लोग
अमर उजाला ब्यूरो
पुवायां। दृढ़ इच्छा शक्ति और आत्म विश्वास हो तो इंसान असंभव को संभव कर सकता है। कुछ ऐसा ही कार्य बेला, मदारपुर के लोगों ने कर दिखाया। नेता, प्रशासन किसी ने नहीं सुनी तो काफी दिन से पुलिया बनवाए जाने की मांग कर रहे गांव के लोगों ने खुद ही पुलिया के पास से रास्ता बनाने की ठान ली और श्रमदान कर रास्ता बना लिया।
पुवायां बंडा मार्ग से गांव बेला, मदारपुर, मियांपुर, चंदुआपुर आदि को जाने वाले रास्ते पर भैंसी नदी की पुलिया दस वर्ष से टूटी पड़ी थी। हालांकि नदी में कई वर्ष से बारिश के मौसम में भी पानी नहीं आता है। इसके बाद भी लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता था। उक्त गांवों के लोगों ने जिला प्रशासन, जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत से जुड़े जन प्रतिनिधियों से लेकर बड़े नेताओं और अधिकारियों से कई बार पुलिया बनवाए जाने की गुहार लगाई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन देकर टरकाया जाता रहा। गांव के लोगों ने विधायक चेतराम से भी मिलकर समस्या का निदान कराने की मांग रखी, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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कुछ दिन पूर्व उक्त गांवों के लोगों ने आपस में सलाह मशविरा करने के बाद क्षेत्र के सभी किसानों से संपर्क किया और खुद ही पुलिया के पास से रास्ता बना लेने के लिए श्रमदान और आर्थिक सहयोग का निर्णय लिया। इसके बाद सोमवार को किसान ट्रैक्टर आदि लेकर मौके पर पहुंचे और श्रमदान कर पुलिया के पास से मिट्टी डाल कर समतल और ऊंचा रास्ता बना दिया।
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दस वर्ष से थी आवागमन समस्या
पुवायां। पुवायां में भैंसी नदी का अस्तित्व मिट चुका है। इस नदी में वर्ष भर में किसी भी समय पानी का नामोनिशान नहीं रहता है। लेकिन गांव बेला मदारपुर, चंदुआपुर आदि के लोगों को पुवायां बंडा मार्ग तक आने के लिए नदी से गुजरना पड़ता। बाइक आदि तो निकल जाती थी, लेकिन ट्रैक्टर ट्राली और अन्य चार पहिया वाहनों को पुलिया टूटी होने के कारण निकालना संभव नहीं था। जिस कारण काफी दूरी का फेर काट कर पुवायां, बंडा पहुंचा जा सकता था। गांव के लोगों के अनुसार दस वर्ष से चल रही समस्या को कोई नेता, अधिकारी सुलझाने पर ध्यान नहीं दे रहा था जिस कारण किसानों ने संयुक्त प्रयास कर रास्ता बनाकर हल कर लिया।
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