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मणिपुरी कलाकारों ने बिखेरी सतरंगी छटा

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cultural - फोटो : amar ujala
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शाहजहांपुर रंग महोत्सव के तीसरे दिन लोककलाओं पर आधारित प्रस्तुतियों का गवाह बना गांधी भवन
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नन्हे उस्तादों ने भी दिखाए जलवे, भरतनाट्यम-कथक की जुगलबंदी भी सराही गई

शाहजहांपुर। काकोरी कांड के महानायकों की स्मृति में मनाए जा रहे अखिल भारतीय शाहजहांपुर रंग महोत्सव के तीसरे दिन गांधी भवन विभिन्न राज्यों की लोककलाओं और शास्त्रीय संगीत से गूंज उठा। दिनभर चले कार्यक्रमों में कलाकारों ने जमकर प्रतिभा का प्रदर्शन किया और तालियां बटोरीं।
तीसरे दिन की पहली प्रस्तुति असम के बिहू नृत्य से हुई। इसके बाद मणिपुरी समूह नृत्य, राजस्थानी रंगीलो म्हारो डोलना, कथक, भरतनाट्यम, सूफी आदि प्रस्तुतियों ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। नृत्य प्रस्तुतियों में हरिनाम संकीर्तन रंग मंडल मणिपुर के अरेंद्र सिंह के निर्देशन में प्रदर्शित लाहरौबा के नृत्य ने समां बांध दिया। रोशनी देवी के नेतृत्व में मोमिनी, बिनो, नंदिनी निमोता, सुनीता और रेनिता ने गायकी से प्रभावित किया। श्रीमंच कोलकाता की अदिति चक्रवर्ती ने लोक नृत्य, कटनी की आंचल चौबे ने लोकनृत्य, बिंदास ग्रुप बरेली की चित्रा और अनु सिंह ने युगल नृत्य, कथक कला केंद्र जबलपुर की श्रुति चौधरी ने कथक नृत्य कर वाहवाही लूटी।
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इसी क्रम में जबलपुर के कथक नृत्य मंदिर के अखिलेश पटेल ने कथक, असम के शंकर देवा चित्रकला विद्यालय के दल ने विहु, नृत्यधाम लखनऊ की अर्चिता श्रीवास्तव ने गणेश वंदना, जबलपुर की अपूर्वा दास ने अंबे आरती, सृष्टि सिंह, पावनी कौशिक और आंचल चौबे ने घूमर, श्रावणी बनर्जी और संचिता कुंदू ने युगल कथक, बिंदास बरेली ने भांगड़ा, प्रेक्षा गुप्ता ने भरतनाट्यम, फाल्गुनी भारद्वाज ने कथक, अन्नू सिंह, बरेली की चित्रा सिंह, खैरागढ़ छत्तीसगढ़ की कान्हा डांस अकेडमी के सूरज कुमार, देवेंद्र उपाध्याय, असम की प्रार्थना बोर्डिलोई और बोरनाली हजारिका, दीपशिखा देवी ने मनमोहक प्रस्तुति देकर दर्शकों को लुभाया।

आधी रात तक गूंजते रहे नाटकों के संवाद
शाहजहांपुर। अखिल भारतीय नाट्य एवं नृत्य प्रतियोगिता के तीसरे दिन गांधी भवन में सोमवार को आठ नाटकों का प्रभावी मंचन किया गया। शाम करीब साढ़े चार बजे से शुरू हुई नाटकों की श्रृंखला आधी रात के बाद तक जारी रही। कड़ाके की सर्दी के बावजूद विभिन्न राज्यों के नाट्य दलों में उत्साह की कोई कमी दिखाई नहीं दी।
तीसरे दिन नाटकों की श्रृंखला का पहला नाटक फर्रुखाबाद के नक्श फाउंडेशन ने कृतिका दुबे द्वारा लिखित और अमित सक्सेना द्वारा निर्देशित नाटक नैना का मंचन किया। इसके बाद अनवरत थियेटर इंदौर की मनीष सोपारकर द्वारा लिखित और नितेश उपाध्याय निर्देशित नाटक ब्रेनवाश, किरदार ग्रुप सहारनपुर ने शंकर शेष केे नाटक बिन बाती के दीप, मानसी अभिनय गुरुकुल सहारनपुर की टीम ने धर्मवीर भारती के नाटक अंधायुग का मंचन किया। इसे योगेश पवार ने निर्देशित किया था।
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इसी क्रम में फिल्म्स एंड थियेटर खैरागढ़ छत्तीसगढ़ ने योगेश यादव द्वारा निर्देशित और हजरत आवारा द्वारा लिखित नाटक कंजूस, अभिनय एंड एक्ट आरा के दल ने जयशंकर प्रसाद की रचना रश्मिरथी पर आधारित नाटक का मंचन किया। इसका निर्देशन प्रशांत ने किया। मणिपुर से आये हरिनाम संकलन नाट्य मंडल ने केबी शर्मा द्वारा लिखित और अरेंदु द्वारा निर्देशित नाटक भक्ति रहस्य तथा शंकरदेव चित्रकला विद्यालय असम के कलाकारों ने देवाशीष द्वारा निर्देशित नाटक संकल्प का प्रभावी मंचन कर तालियां बटोरीं। इस अवसर पर केके कठेरिया, डॉ. सत्य प्रकाश मिश्र, एसके कनौजिया, सुनीता कठेरिया, मनोज मंजुल, जगदीश रस्तोगी, प्रमोद प्रमिल समेत बड़ी संख्या में नाट्यप्रेमी मौजूद रहे।
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