शाहजहांपुर। कथा व्यास बृजेश पाठक ने कहा कि भगवान से संबंध जोड़ने पर ही जीव का कल्याण संभव है। एक बार यदि संबंध जुड़ गए तो भगवान प्रत्येक दशा में इसे निभाते जरूर हैं। वह शुक्रवार को रंगमहला स्थित हिंदू सत्संग भवन में श्री राम कथा के समापन पर प्रवचन दे रहे थे।
उन्होंने पिता पुत्र संबंध का उदाहरण देते हुए कहा की मानस में दो व्यक्तियों ने भगवान को अपना पुत्र माना। इनमें एक दशरथ जी और दूसरे गिद्धराज जटायु हैं। इस प्रसंग की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा जैसी मृत्यु गिद्धराज को मिली वह संभव नहीं। भगवान ने उन्हें अपनी गोद में लिटाया अपनी जटाओं से उनके शरीर को झाड़ते हुए उनसे बार बार अपना शरीर न छोड़ने का आग्रह भी किया। उनका प्राणांत होने पर उनका अंतिम संस्कार स्वयं अपने हाथों से किया। उन्होंने तुलसीदास जी के ग्रंथों के उदाहरण देते हुए कहा की भुक्ति, मुक्ति व भक्ति एक साथ कभी किसी को नहीं मिलती, किंतु गिद्धराज जटायू पूरे विश्व के इतिहास में अकेले हैं। जिन्हें भोग भी मिले, फिर भगवान ने अपनी भक्ति का वरदान देकर मुक्ति भी प्रदान की।
वहीं दूसरी ओर दशरथ जी ने भगवान के वियोग में प्राण त्याग दिए व भगवान ने उन्हें भी स्वर्ग भेजा। महाराज जी ने सेवक संबंध की चर्चा करते हुए लक्ष्मण व हनुमान के चरित्र पर भी प्रकाश डाला। समापन से पहले सभी के द्वारा व्यास पूजन भी किया गया। सत्संग भवन समिति के सचिव विनय चड्ढा ने सभी का आभार जताया। इस मौके पर यजमान पराग अग्रवाल, उमेश गुप्ता, मोहनलाल गुप्ता, धीरू खन्ना, मुकुल अग्रवाल आदि मौजूद रहे।