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ट्रैफिक पुलिस के डर से नहीं, जान बचाने को पहनिए हेलमेट

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फोटो-7, 8
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ट्रैफिक पुलिस के डर से नहीं, जान बचाने को पहनिए हेलमेट
हेलमेट न होने से दुर्घटना में जान गंवाने वाले 90 फीसदी युवा

शाहजहांपुर। सड़क दुर्घटनाओं का शिकार लोगों में हेलमेट न पहनने और सीट बेल्ट नहीं बांधने वालों में युवाओं की संख्या सबसे ज्यादा है। दो पहिया वाहन चलाते हुए दुर्घटना की चपेट में आने वाले सैकड़ों युवा हर साल सिर की गंभीर चोटों से जान से हाथ धो बैठते हैं। गंभीर बात यह है कि 80 फीसदी लोग हेलमेट और कार में सीट बेल्ट नहीं लगाने की वजह से दुर्घटनाओं में मौत के मुंह में समा जाते हैं।
जानकारों के मुताबिक 95 फीसदी सिर की गंभीर चोट को हेलमेट से रोका जा सकता है। हेलमेट न होने की वजह से दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले 90 फीसदी युवा होते हैं। सिर की गंभीर चोटों से केवल हेलमेट ही बचा सकता है। युवा इन सारी बातों को अच्छी तरह जानता तो है, लेकिन मानते नहीं। वह सिर्फ चालान कटने के डर से हेलमेट पहनने की औपचारिकता पूरी करते हैं। ऐसा करते हुए उनको अपने जीवन की सुरक्षा का ख्याल एक बार भी नहीं आता। कुछ दिन पहले कांट में कुर्रिया कलां रोड पर ट्रैक्टर-ट्रॉली की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम में मौत का मुख्य कारण सिर में गंभीर चोट बताया गया। जाहिर है कि अगर हेलमेट होता तो जान बच सकती थी। ऐसी तमाम दुर्घटनाएं हैं जिसमें सिर्फ हेलमेट न होने से जान चली जाती है।
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ट्रैफिक पुलिस का दोहरा रवैया
ट्रैफिक पुलिस एक ओर बिना हेलमेट बाइक चलाने वालों के खिलाफ करती है तो दूसरी ओर जान जोखिम में डालकर क्षमता से अधिक सवारियां बैठाकर फर्राटे से दौड़ने वाले डग्गामार वाहनों को की ओर कोई ध्यान नहीं देती। डग्गामार वाहनों को अंदर ही नहीं छत पर भी सवारियों को ठसाठस भरकर सड़कों पर तेज रफ्तार दौड़ते देखे जा सकते हैं। यह डग्गामार वाहन भी हादसों का कारण बनते हैं। ट्रैफिक पुलिस का दोहरा रवैया सभी के सामने है। अफसर इस पर बोलने से बचते हैं।
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महिलाएं निभा सकती हैं अहम भूमिका
- सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों का आंकड़ा कम करने में महिलाएं भी अहम रोल निभा सकती हैं। पति, भाई या बेटे को वह बिना हेलमेट बाइक ड्राइव नहीं करनें देंगी। घर से बाइक लेकर निकलने पर हेलमेट की याद दिलाएंगी। इसके अलावा अगर वह कार में साथ हैं तो सीट बेल्ट बांध कर कार ड्राइव करने को फोर्स कर सकती हैं। बिना हेलमेट और सीट बेल्ट वाहन ड्राइव के साथ यातायत नियमों के उल्लंघन से भी रोक सकती हैं। अगर ऐसा होता है तो सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या निश्चित कम होगी।
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वर्जन-
ट्रैफिक पुलिस जागरूकता के साथ-साथ हेलमेट और सीट बेल्ट इस्तेमाल न करने वालों के खिलाफ समय-समय पर अभियान चलाती है। लोगों खासकर युवाओं को खुद भी जागरूक होने की जरूरत है। अपने सुरक्षा के प्रति जागरूक रहना सभी की जिम्मेदारी है।
- दिनेश त्रिपाठी, एसपी सिटी
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