शाहजहांपुर। केंद्र सरकार की जीएसटी कौंसिल द्वारा आगामी एक फरवरी से राष्ट्रीय स्तर पर माल के अंतर प्रांतीय आवागमन को लागू की जा रही केंद्रीय ई-वे बिल व्यवस्था से व्यापारियों को परिचित कराने के लिए वाणिज्य कर कार्यालय में कार्यशाला हुई। इस अवसर पर डिप्टी कमिश्नर रमेश कुमार सिंह वैस सहित अन्य अधिकारियों ने विभिन्न व्यवसायों से जुड़े कारोबारियों को केंद्रीय ई-वे बिल व्यवस्था के लाभों से परिचित कराते हुए कहा कि कई व्यवसायिक वस्तुओं के परिवहन से नई व्यवस्था में छूट मिलने पर व्यापारियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
उपायुक्त वैस ने बताया कि केंद्रीय ई-वे बिल व्यवस्था आरंभ होने के साथ राज्य में पहले से प्रचलित ई-वे बिल संख्या एक, दो व तीन जमा करने, टीडीएफ तथा अपंजीकृत व्यापारियों के लिए डाउनलोड की जाने वाली ई-वे बिल व्यवस्था स्वत: समाप्त हो जाएगी। इसके साथ ही जीएसटी के चैप्टर 71 में शामिल बहुमूल्य धातुओं एवं आभूषणों, घरेलू उपभोग की एलपीजी, पीडीएस सिस्टम के तहत वितरित होने वाले मिट्टी के तेल, भारतीय मुद्रा और पुरानी श्रेणी के प्रयुक्त निजी एवं घरेलू सामान के परिवहन पर नेशनल ई-वे बिल डाउनलोड करना आवश्यक नहीं होगा।
सहायक आयुक्त अनंत राम ने कहा कि जीएसटी की नियमावली के अनुसार 50000 रुपये से अधिक मूल्य के माल का परिवहन करने पर ट्रांसपोर्टर को ई-वे बिल डाउनलोड करना अनिवार्य होगा। सहायक आयुक्त अजीत सिंह और विशाल सिंह ने पोर्टल से ई-वे बिल जनरेट करने की विधि समझाते हुए कहा कि इसके लिए व्यापारियों को ऑनलाइन पंजीयन कराना होगा। अधिकारियों ने कहा कि अभी तक एक राज्य से दूसरे राज्य तक माल ले जाने की दशा में विक्रेता, क्रेता और ट्रांसपोर्टर को कई राज्यों में ट्रांजिट डिक्लेयरेशन फार्म (टीडीएफ) डाउनलोड करना पड़ता था, लेकिन केंद्रीय ई-वे बिल सिस्टम में किसी एक पक्ष को सिर्फ एक बार टीडीएफ हासिल करना पड़ेगा। इसे सरल तरीके से समझाते हुए वैस ने कहा कि भारत में माल से भरा कोई वाहन एक बार चेक होने के बाद उसकी दोबारा जांच नहीं होगी। भले ही उसके रास्ते में कई राज्य पड़ते हों।
व्यापारियों ने विभागीय सर्वर चालू रखने पर दिया जोर
कार्यशाला में व्यापारियों का नेतृत्व करते हुए उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल कंछल गुट के नगर अध्यक्ष सचिन बाथम ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर सरकार कोई योजना बनाए, वह जन सामान्य की बेहतरी के लिए होती है। कमी किसी व्यवस्था में नहीं, बल्कि उसके अनुपालन में आने वाली दिक्कतों से होती है। बेशक केंद्रीय ई-वे बिल प्रणाली से व्यापार करना आसान होगा, लेकिन यह संभव तभी होगा जब ऑनलाइन सिस्टम को प्रभावी बनाए रखने के लिए विभागीय सर्वर चालू हालत में रखा जाए। व्यापारी नेता बाथम का समर्थन करते हुए संगठन के मंत्री अमित शर्मा, उवैस खां, पंकज टंडन आदि ने कहा कि सर्वर खराब होने की दशा में व्यापारियों को पेनाल्टी की देनदारी से मुक्त रखा जाए। इस मौके पर महेंद्र चावला, मुईन खां, रितेश सेठी, सचिन अरोड़ा, रामऔतार मित्रा, राकेश सक्सेना, अनुराग शुक्ला, अविरल गुप्ता आदि मौजूद रहे।