बेमौसम की बारिश और ओलावृष्टि से हुए फसली नुकसान का आकलन करने के लिए प्रशासन द्वारा दोबारा कराए गए गाटा नंबर वार सर्वे में सिर्फ दो हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल 50 फीसदी क्षति से प्रभावित पाया गया। प्रशासन ने लेखपालों से मिली इसी रिपोर्ट के आधार पर किसानों को मुआवजा देने के लिए शासन को 3.71 करोड़ रुपये की डिमांड भेजी है। बमुश्किल एक सप्ताह में 2335 राजस्व गांवों में कराए गए सर्वे को लेकर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि आरंभिक सर्वे में नुकसान 25 फीसदी तक सीमित होने के बावजूद 64861.06 हेक्टेयर क्षेत्रफल में नुकसान होना पाया गया था।
आरंभिक सर्वे में राजस्व और कृषि विभाग के कर्मचारियों को जुटाया गया, लेकिन शासन ने 50 फीसदी फसली क्षति वाले 37 जनपदों में शाहजहांपुर को शामिल किया तो प्रशासन ने गाटा वार सर्वे शुरू कराया। इन सभी गांवों में लेखपालों को खतौनियों में दर्ज गाटा नंबरों के अनुसार प्रत्येक खेत पर जाकर नुकसान का आकलन करना था, लेकिन समय की कमी से ऐसा हो नहीं पाया। नतीजे में दोबारा सर्वे का काम मानकों को ताक पर रखकर पूरा कर लिया गया।
पैमाइश केलिए नहीं हुआ जरीब का इस्तेमाल
नियमानुसार खेत में गिरी फसल का क्षेत्रफल जानने के लिए लेखपालों को निश्चित माप वाली जरीब (लोहे की जंजीर जैसा मापक) का इस्तेमाल करना चाहिए, लेकिन तमाम गांवों में यह प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। ग्रामीणों के अनुसार खतौनियों में दर्ज रकबा देखकर फसली नुकसान का मनमाने तरीके से अनुमान लगाया गया। कई लेखपाल भी मानते हैं कि सीमित समय में जरीब से प्रत्येक प्लाट (खेत) का सर्वे व्यवहारिक रूप से संभव नहीं हो सका।
गाटा वार सर्वे में इसलिए पड़ी बाधा
जिन किसानोें की फसलें तेज हवा में गिरने के बजाय केवल झुकीं, उन्होंने मुआवजा पाने को नुकसान बढ़ा-चढ़ाकर दर्ज करने का लेखपालों पर दबाव बनाया गया। लेखपालों के अनुसार गांव में जाते ही ऐेसे किसान उन्हें घेरकर 40 से 50 फीसदी नुकसान दर्ज कराने का प्रयास करते रहे। गांवों में ऐसे भी किसान हैं जिनका वाकई नुकसान ज्यादा हुआ है, लेकिन उन्हें बुलाने पर तमाम ऐसे काश्तकारों ने मौके पर आकर काम में अवरोध डाला, जिन्हें मुश्किल से 15-20 फीसदी क्षति हुई है।
वर्षा आधारित है शासन की नुकसान संबंधी रिपोर्ट
एडीएम वित्त एवं राजस्व पीके श्रीवास्तव के अनुसार 50 फीसदी फसली नुकसान की शासन की रिपोर्ट में वर्षा और ओलावृष्टि को आधार बनाया गया है। उन्होंने कहा कि विभिन्न तहसीलों में दो हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में 50 फीसदी फसली क्षति की पुष्टि हुई है। इसकी भरपाई के लिए शासन से 3.71 करोड़ की धनराशि मांगी गई है। इससे कम फसली क्षति वाले किसानों को मुआवजा के लिए शासन से प्राप्त दिशा निर्देशों के अनुरूप कार्यवाही की जाएगी।
फसल वार नुकसान की आरंभिक सर्वे रिपोर्ट: एक नजर
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फसलें बुवाई क्षेत्रफल प्रभावित क्षेत्रफल नुकसान प्रतिशत
0 गेहूं 209736.70 51159.67 24.4
0 सरसों 17466.85 4249.97 24.3
0 चना 59.30 19.75 33.3
0 मटर 354.75 99.86 28.1
0 आलू 6552.10 1337.46 20.4
0 मसूर 16802.20 4722.33 28.1
0 अन्य फसलें 18585.80 3272.02 17.6
(क्षेत्रफल हेक्टेयर में दिया गया है)
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