शाहजहांपुर। पक्के मकान वाले 246 लोगों को ग्रामीण अभियंत्रण विभाग ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 40 हजार रुपये की किस्त जारी कर दी। जिला स्तरीय टीम की जांच में खुलासा होने के बाद करीब 98 लाख 40 हजार रुपये का घोटाला सामने आया है। जिसके बाद अपात्रों से वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामीण अभियंत्रण विभाग को वर्ष 2016-17 से 2023-24 के बीच 70,884 मकानों को बनाने का लक्ष्य मिला है। इसके सापेक्ष सौ प्रतिशत आवास स्वीकृत कर दिए गए। इनमें से 975 आवास अपूर्ण थे। इनका निर्माण मार्च 2024 में पूरा हो जाना चाहिए था। इस मामले में उच्चाधिकारियों ने जांच के निर्देश दिए थे।
जांच में पाया गया कि 246 लाभार्थी मानक ही नहीं पूरे कर रहे थे। इनके पहले से ही पक्के मकान बने हुए हैं। इनको भी प्रथम किस्त के रूप में 40 हजार रुपये जारी कर दिए गए। खुलासा होने के बाद विभाग की तरफ से तीन नोटिस जारी किए गए थे।
विभाग की ओर से 16 लोगों से वसूली कर ली गई है। वसूली का कार्य अभी चल रहा है। अगर एक माह के अंदर ये लोग हड़पी हुई रकम वापस नहीं करते हैं तो आरसी काटने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके अलावा 729 लाभार्थियों ने पहली किस्त 40 हजार रुपये लेने के बाद भी निर्माण शुरू नहीं कराया। अधिकतर लोगों ने सरकार की तरफ से मिली पहली किस्त को खर्च कर दिया। किसी ने दिखाने के लिए थोड़ा निर्माण कार्य करा दिया था।
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चयन प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल
-विभाग की तरफ से अपूर्ण आवासों की जांच कराई गई। इसमें उनके कागजातों की जांच की गई और वे अपात्र पाए गए। सवाल यह उठता है कि अपात्रों को आवास आवंटित कैसे हो गए? बिना मिलीभगत के अपात्रों को आवास आवंटित होना संभव नहीं हैं। इसमें विभाग से लेकर राजस्व विभाग के लोगों की जांच कराई जाए तो पूरा मामला खुलकर सामने आएगा।
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अपूर्ण प्रधानमंत्री आवासों की जांच कराने पर पता चला कि 246 लोग अपात्र हैं। उन्होंने योजना की प्रथम किस्त लेकर हड़प ली है। इसके बाद संबंधित लोगों को तीन नोटिस भेजे गए। रकम जमा नहीं करने पर वसूली की प्रक्रिया शुरू हो गई है। एक माह में अंदर अगर रकम जमा नहीं हुई तो आरसी काटी जाएगी।
- अवधेश राम, पीडी डीआरडीए