शाहजहांपुर। खसरा और रूबैला से बचाव के लिए नौ मार्च से अभियान को शुरू किया जाएगा। इसके तहत करीब 22 सौ निजी-सरकारी स्कूलों और मदरसों के बच्चों का टीकाकरण किया जाएगा। अभियान के तहत 425 एएनएम को जिम्मेदारी दी गई है।
पांच से दस साल तक के बच्चों में खसरे के केस मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। विभाग अतिरिक्त अभियान चलाते हुए नौ माह से 15 वर्ष तक आयु के बच्चों के टीके लगाएगा। डिप्टी सीएमओ डॉ.मोहम्मद आसिफ ने बताया कि कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को टीका लगाने के लिए अभियान नौ मार्च से शुरू होगा। 20 मार्च तक चलने वाले अभियान में 2200 स्कूलों को कवर किया जाएगा। इसके लिए एएनएम की ड्यूटी लगाई है। आशा वर्कर्स का सहयोग भी लिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि खसरा एक जानलेवा बीमारी है। इससे बच्चों के शरीर पर लाल चकत्ते हो जाते हैं। नाक बहना, खांसी आदि की समस्या होने लगती है। जटिलता होने पर दिमागी बुखार हो सकता है। इसी तरह निमोनिया व डायरिया से बच्चे पीड़ित हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि सभी स्कूलों में नोडल टीचर से संपर्क साधा गया है।
रूबेला से गर्भवती व शिशु को नुकसान
रूबेला से महिला व उसके बच्चे दोनों को नुकसान हो सकता है। डॉक्टर के अनुसार, रूबेला से पीड़ित गर्भवती महिला में गर्भपात होने का खतरा रहता है। प्रसव के बाद बच्चे के मानसिक विकास में कमी, जन्मजात विकृति, आंखों की रोशनी में कमी की समस्या हो सकती है।