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दिल्ली के यज्ञ में आहुति देने पहुंचे किसान : वीएम सिंह

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किसान दिल्ली के यज्ञ में आहुति देने पहुंचे : वीएम सिंह
संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग को लेकर रामलीला मैदान में जुटेंगे किसान
किसान हित के दो बिलों को किया जा चुका है दाखिल

अमर उजाला ब्यूरो
पुवायां (शाहजहांपुर)। किसान मजदूर संगठन के मुखिया और किसान नेता वीएम सिंह ने कहा कि दिल्ली के रामलीला मैदान में 29 और 30 नवंबर को देश भर के किसान एकत्र होंगे और किसान हित के दो कानूनों को पास कराने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की मांग करेंगे। उन्होंने किसानों से अपने हित के इस यज्ञ में दिल्ली पहुंचकर आहुति डालने की अपील की है।
मंगलवार को खुटार के एक मैरिज पैलेस में पत्रकारों से बात करते हुए किसान नेता ने कहा कि सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें अभी तक नहीं लागू की हैं। इस आयोग की सिफारिश थी कि किसान को लागत का डेढ़ गुना मूल्य मिलना चाहिए। यह सिफारिशें वर्ष 2007 से ही लागू हो जानी चाहिए थीं, लेकिन आज तक ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि लोकसभा और राज्यसभा में दो सदस्यों ने किसान हित के बिल पास कराने के लिए दाखिल कर रखे हैं। सभी पार्टियां किसान हितैषी होने का दावा करती हैं तो सभी को मिलकर इन्हें पास कराना चाहिए। इस बिल को पास कराने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने के लिए वह देश भर के सभी किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ राष्ट्रपति तक से मिल चुके हैं।
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वीएम सिंह ने कहा कि जीएसटी को लागू करने के लिए विशेष सत्र बुलाया जा सकता है तो किसान हित के लिए क्यों नहीं। उन्होंने कहा कि तमाम विपक्षी पार्टियों और सरकार में शामिल शिवसेना, जनता दल यूनाइटेड उन्हें किसान हित पर समर्थन का भरोसा दिला चुके हैं, अब भाजपा को भी आगे आकर बिल को पास कराना चाहिए।
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डीजल, खाद, गैस, दवाओं के दाम निर्धारित तो किसान की उपज के क्यों नहीं
पुवायां। किसान नेता वीएम सिंह ने खुटार में तमाम किसानों के बीच अनी बात रखते हुए कहा कि डीजल, गैस, खाद के रेट निर्धारित हैं और कहीं भी एक रुपया भी कम नहीं लिया जाता तो किसान की फसल के रेट तय होने के बाद उससे कम पर खरीद क्यों होती है। कम रेट में खरीद पर जेल भेजे जाने का प्रावधान किया जाना चाहिए।
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इस दौरान खेत में पराली जलाए जाने का मामला उठा तो किसान नेता ने कहा कि खेत में पराली न जलाए जाने पर तमाम कृषि उपकरणों की खरीद में अनुदान की बात की जाती है, लेकिन जब किसान अनुदान के लिए आवेदन करता है तो उसे टरका दिया जाता है। इस दौरान तमाम किसान मौजूद थे और सभी ने 29 और 30 नवंबर को भारी संख्या में दिल्ली पहुंचने का आश्वासन दिया।
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