जलालाबाद। बहगुल नदी के पार बसे दर्जनों गांवों के हजारों लोग अपनी जान जोखिम में डालकर तहसील मुख्यालय पहुंच पा रहे है हालांकि ग्रामीणों के आवागमन के लिए हर साल की तरह इस नदी पर पैंटून पुल बनाया गया था परंतु वह भ्रष्टाचार के चलते ग्रामीणों के काम नहीं आ रहा।
बहुगुल नदी के पार जिस इलाके की बात कर रहे है उसके दूसरी ओर रामगंगा नदी है बीच टापू वाले इन गांवों के लोगों के लिए लोक निर्माण विभाग की ओर से हर साल की तरह नवंबर महीने में बहगुल नदी पर पैंटून पुल का निर्माण कराया गया था परंतु भ्रष्टाचार के चलते न केवल इसे अधूरा बनाकर छोड़ दिया बल्कि इसमें बिछाए गए पटले जगह जगह टूटे व पूरी तरह क्षतिग्रस्त हैं। यहां से हो रहे आवागमन के दौरान लोगों को खतरनाक टूटे पटलों से होकर निकलने के बाद आगे पानी और बाद में कीचड़ में घुसकर निकलना उनकी मजबूरी बन गई है। गांव वालों को सबसे ज्यादा डर उन बच्चों को लेकर सताता है, जो रोजाना पढ़ाई के लिए जलालाबाद आते-जाते हैं।
पक्के पुल निर्माण को लेकर शुरू किया आंदोलन
तिकोला गांव के पास बहगुल नदी पर पक्का पुल बनवाए जाने की इस क्षेत्र की जनता लंबे समय से मांग करती आ रही है परंतु हर साल पैंटून पुल का लालीपॉप थमाकर उन्हें शांत कर दिया जाता है परंतु इस साल यह पुल निर्माण के दौरान ही घोर अनियमितता व भ्रष्टाचार का शिकार हो गया जिससे भड़के ग्रामीण सोमवार को तिकोला गंाव स्थित देवी मंदिर के पास धरने पर बैठ गए और जोरदार प्रदर्शन कर नारेबाजी की। बाद में यह ग्रामीण तहसील पहुंचे और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम वेद सिंह चौहान को दिया जिसमें आठ दिन के अंदर यदि पुल निर्माण की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई न हुई तो आंदोलन को और तेज करने और लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने की चेतावनी दी गई है।