वित्तविहीन शिक्षकों के बहिष्कार के चलते जिस गति से मूल्यांकन चल रहा है, उससे लगता है कि एक माह में भी मूल्यांकन पूरा नहीं हो पाएगा, जबकि मूल्यांकन के लिए 15 दिन का समय ही दिया जाता है। मूल्यांकन गति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चार दिन में बमुश्किल 60270 कापियां ही जांची जा सकी हैं, जबकि यह संख्या दो लाख के आसपास होनी चाहिए थी। क्योंकि परिषद से जनपद में 772981 उत्तर पुस्तिकाएं मूल्यांकन के लिए आवंटित की हैं।
यहां बता दें कि 17 मार्च को यानी पहले दिन मूल्यांकन बहिष्कार के बीच मात्र 5051 कापियों का मूल्यांकन ही हो सका था, जबकि दूसरे दिन यह संख्या बढ़कर 14187 हो गई। तीसरे दिन 18725 और चौथे दिन 22307 उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन हुआ। यह सही है कि दिन-प्रतिदिन कापियां की संख्या में वृद्धि हो रही है, लेकिन यह संख्या भी नाकाफी है। क्योंकि लगभग पौने आठ लाख उत्तर पुस्तिकाओं के सापेक्ष चार दिन में मात्र 60270 कापियां ही जांची जा सकी हैं।
इसका कारण यह है कि अभी तक 66 डिप्टी हेड और 1432 परीक्षक मूल्यांकन केंद्रों तक नहीं पहुंच सके हैं। परिषद से नियुक्त 207 डिप्टी हेड और 1907 परीक्षकों में से चौथे दिन मात्र 141 डिप्टी हेड और 475 परीक्षकों ने ही मूल्यांकन किया है।