शाहजहांपुर। मदरसों के लिए शासन से आने वाले कई तरह के आदेशों से संचालकों व शिक्षकों के भविष्य पर खतरा मंडराने लगा था। मदरसा बोर्ड को खत्म कर बच्चों को सरकारी स्कूलों में शिक्षा देने के आदेश से सबसे ज्यादा खलबली मची थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मदरसा संचालक खुश हैं।
जिले में करीब ढाई सौ मदरसों का संचालन होता है। यहां दीनी के साथ दुनियावी तालीम भी दी जाती है। इस वर्ष शासन ने मदरसों का सत्यापन कराया था। अधिकारियों की रिपोर्ट आने के बाद 175 मान्यता प्राप्त मदरसों का संचालन होता मिला, साथ 26 गैर मान्यता प्राप्त मदरसे सामने मिले थे। सर्वे के बाद बिना मान्यता वाले मदरसा संचालकों ने जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कार्यालय के चक्कर लगाना शुरू किए। काफी चक्कर लगाने के बाद मान्यता नहीं मिल सकी।
इस बीच मदरसा बोर्ड को असंवैधानिक करार देने के साथ हिंदू बच्चों को मदरसों के बजाय स्कूलों में शिक्षा देने के निर्देश आए। शासन से आने वाले नित्य नए निर्देशों से मदरसा संचालक काफी परेशान थे। उन्हें भविष्य को लेकर चिंता सताने लगी थी। बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मदरसा संचालकों व शिक्षकों ने राहत भरी सांस ली है। मदरसा संचालकों ने बताया कि कोर्ट के आदेश से बड़ी राहत मिली है, साथ ही मदरसों को बंद नहीं किया जाएगा। बोर्ड के ना होने से मदरसा शिक्षक बेरोजगार हो जाएंगे। अब मदरसों को मान्यता मिलने की उम्मीद भी जग गई है।
-सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लेकर अभी निदेशालय से कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। शासन के निर्देश के क्रम में मदरसों में शिक्षण कार्य कराया जाएगा।
मोहम्मद खालिद, डीएमओ