शाहजहांपुर। खतरे के निशान से ऊपर बह रहीं गर्रा और खन्नौत नदियों का पानी बुधवार को शहर में घुस गया। पानी से घिरे कई पॉश कॉलोनियों और मोहल्लों में फंसे लोगों को निकालने के लिए एनडीआरएफ की टीम को मोर्चा संभालना पड़ा। साथ ही सेना की मदद ली गई। सेना, पुलिस व पीएसी के जवानों की मदद से नाव और स्टीमर से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। इस दौरान करीब दो हजार लोगों को बाहर निकाला गया। बाढ़ से शहर के करीब 20 हजार लोग प्रभावित हुए हैं। यह पहली बार है जब बाढ़ के पानी ने आधे शहर को अपनी जद में लिया है तो बचाव के लिए सेना को बुलाना पड़ा है।
शाहजहांपुर शहर खन्नौत और गर्रा नदी के बीच में बसा है। अब शहर इन नदियों के पार भी विस्तार ले चुका है। सोमवार को खन्नौत नदी के आसपास बसे इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंच गया। मंगलवार रात से अचानक जलस्तर में वृद्धि हुई और आसपास के कई मोहल्लों में पानी तेजी से बढ़ने लगा।
ऐसे में रात में ही अक्षरधाम कॉलोनी के 25 परिवारों को किसी तरह से निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। सुबह होते-होते ब्रजविहार, लोधीपुर, दलेलगंज, ख्वाजा फिरोज, हनुमतधाम, इंदिरानगर, हयातपुरा आदि मोहल्लों के सारे मकान पानी से घिर गए। लोगों ने छतों पर शरण ली। दूध-पानी तक के लिए वे तरसते रहे।
इसके बाद प्रशासन ने बचाव कार्य शुरू कराया। नावों का इंतजाम किया गया और फंसे हुए लोगों को बाहर निकाला जाना शुरू किया गया। वहीं, गर्रा नदी के उफनाने से सुभाष नगर कॉलोनी में पानी भर गया। हालात बेकाबू होते देखकर प्रशासन ने सेना से मदद मांगी। दोपहर में 21 बटालियन, मद्रास रेजीमेंट के जवान मदद के लिए पहुंचे।
एनडीआरएफ की टीम भी आ गई। पुलिस, पीएसी, सेना और एनडीआरएफ की टीमों ने तीन स्टीमर की मदद से बाढ़ में फंसे लोगों को निकाला। लोग बैग में जरूरी सामान, जेवर-रुपये लेकर बाहर आए। बच्चों, बीमार और बुजुर्गों पर आफत टूट पड़ी। लोगों के रुकने की शेल्टर होमों में व्यवस्था कराई गई।
हालांकि लोगों ने शेल्टर होम में रुकने से परहेज किया और अपनी रिश्तेदारियों में चले गए। कुछ लोगों ने होटलों में कमरे भी किराये पर लिए। लोगों के मुताबिक, शहर में बाढ़ से इतने खराब हालात कभी नहीं हुए। नदी के किनारे बसे मोहल्लों में तो पानी घुसा लेकिन कभी शहर के अंदर नहीं आया। शाम तक राहत का कार्य जारी रहा।
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गंगा और रामगंगा का जलस्तर बढ़ा, खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर बह रही खन्नौत
शाहजहांपुर। गंगा, रामगंगा और अन्य सहायक नदियों के जलस्तर में बुधवार को पांचवें दिन भी वृद्धि जारी रहने से जिले में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई। शहर में खन्नौत नदी 90 सेमी वृद्धि के कारण खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर पहुंच गई तो गर्रा नदी खतरे के निशान से पांच सेमी ऊपर चल रही थी।
बीते 24 घंटों के दौरान भैंसार बांध पर गंगा का जलस्तर 1.92 मीटर गेज बढ़ जाने से कलान तहसील के करीब एक दर्जन गांव बाढ़ के निशाने पर आ गए। रामगंगा में पानी बढ़ने से जैतीपुर से लेकर जलालाबाद तक और परौर से अल्हागंज तक तटवर्ती गांवों के खेतों की फसलें डूब गईं और बाढ़ का पानी गांवों की ओर बढ़ने लगा।
गंगा, रामगंगा में उफान जारी रहने से कई गांवों में पानी भरने के साथ उनके संपर्क मार्ग डूब गए। इससे तमाम ग्रामीण गांवों में फंस गए और आवागमन प्रभावित रहा। इस समय तिलहर-निगोही मार्ग पर गांव रटा के समीप गर्रा नदी का पानी दो फुट बह रहा है। यहां भारी वाहनों का प्रवेश रोक दिया गया है।
तिलहर के गांव घनश्यामपुर, चितीबोझी, बिहारीपुर, अजमाबाद और रटा में घरों में पानी घुस गया है। खुदागंज और गढ़ियारंगीन क्षेत्र के चार-चार गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। इन गांवों की गलियों में पानी प्रवेश कर गया है। संवाद