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आवास विकास कालोनी के लिए चिन्हित जमीनों पर हुए पक्के निर्माण

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अधिगृहीत जमीन पर कर लिया कब्जा
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सरकार ने आवास विकास कॉलोनी के लिए चिन्हित की थी किसानों की जमीन
आवास विकास परिषद ने प्रस्तावित कॉलोनी बरेली मोड़ स्थानांतरित कर दी थी
अब सरकार ने जमीन किसानों को लौटाने का लिया निर्णय
हथौड़ा-रेती मार्ग पर विभिन्न गांवों की जमीन का होना था अधिग्रहण
दो दशक में 100 गुना बढ़ीं बाजार दरें, अधिग्रहण से पीछे हटी सरकार
फोटो-26 में।
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। दो दशक पहले प्रदेश की तत्कालीन भाजपा सरकार के कार्यकाल में नियोजन राज्यमंत्री के पद पर रहते नगर विकास मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने हथौड़ा-रेती मार्ग पर आवास विकास कॉलोनी के लिए विभिन्न गांवों की जमीन अधिग्रहण कार्यवाही के लिए चिन्हित कराई थी, लेकिन बाद में आवास विकास परिषद द्वारा प्रस्तावित कॉलोनी बरेली मोड़ स्थानांतरित कर दिए जाने पर लोगों ने खाली पड़ी जमीनों पर पक्के निर्माण कराने शुरू कर दिए। यही नहीं, इसी जमीन के एक हिस्से पर भाजपा कार्यालय का तीन मंजिला भवन भी निर्माणाधीन है। चिन्हित जमीनों का शासन स्तर से नोटिफिकेशन भी जारी हुआ, लेकिन तब से जमीन की बाजार दरें करीब सौ गुना बढ़ गई हैं, इसलिए सरकार ने अधिग्रहण के लिए चयनित जमीनें संबंधित किसानों को लौटाने का निर्णय लिया है।
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28.801 हेक्टेयर जमीन वर्ष 1998 में हुई थी अधिसूचित
कॉलोनी बनाने के लिए हथौड़ा चौराहा स्थित गन्ना शोध परिषद निदेशक के आवास परिसर के दक्षिण दिशा में अहमदपुर रेती तक ग्राम हथौड़ा बुजुर्ग, लौका, रसूलपुर जहानगंज और अहमदपुर नियाजपुर गांव के किसानों की राजस्व अभिलेखों में एक सौ से अधिक गाटा नंबरों पर दर्ज 28.801 हेक्टेयर जमीन चिन्हित की गई थी। इसमें सर्वाधिक 15.120 हेक्टेयर जमीन हथौड़ा बुजुर्ग की और सबसे कम 3.135 हेक्टेयर जमीन लौका गांव की चयनित हुई। राजस्व अभिलेखों में लौका गैर आबाद गांव दर्ज है, क्योंकि वहां के अधिसंख्य ग्रामीण शहर के करीबी गांव हथौड़ा और रसूलपुर जहानगंज (अब लोधीपुर) में मकान बनाकर बस गए हैं, लेकिन वहां की कृषि भूमि पर आज भी खेती हो रही है। इन जमीनों पर किसी भी तरह का पक्का निर्माण रोकने के लिए आवास विकास परिषद ने 25 अगस्त 1998 को सार्वजनिक सूचना जारी करने के साथ रोड के किनारे परियोजना स्थल पर बोर्ड भी लगा दिया। यही नहीं, प्रदेश सरकार ने तीन अक्तूबर को गजट जारी कर चिन्हित जमीनों को अधिग्रहण कार्यवाही के लिए अधिसूचित किया था।
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अधिग्रहण के प्रस्ताव का किसानों के स्तर से हो चुका विरोध
जमीनों के अधिग्रहण को नोटिफिकेशन जारी होने पर क्षेत्र के तमाम किसानों ने शुरू से विरोध किया, लेकिन तत्कालीन सरकार ने उनकी आपत्तियों को कोई भाव नहीं दिया। हालांकि, बाद में आवास विकास परिषद द्वारा प्रस्तावित कॉलोनी बरेली मोड़ पर बना दिए जाने और सत्ता परिवर्तन होने पर सपा-बसपा शासनकाल में इस प्रोजेक्ट के ठंडे बस्ते में पड़े रहने से विरोध के स्वर भी धीमे पड़ गए। अपवाद के तौर पर कुछ किसानों ने आवास विकास परिषद में अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। एक किसान का कहना था कि उनसे वार्ता किए बगैर जमीन अधिग्रहीत की जा रही है। एक अन्य किसान ने आपत्ति दर्ज कराई कि उसकी गैर मौजूदगी में जमीन अधिसूचित करने का बोर्ड लगा दिया जबकि कुछ किसानों ने उचित मुआवजा दिए जाने की मांग की। करीब छह माह पूर्व आवास विकास परिषद के सहायक अभियंता नवीन वर्मा ने कैंप लगाकर किसानों को संतुष्ट करने का प्रयास किया, लेकिन अधिसूचित जमीन को लेकर अनिश्चय की स्थिति बरकरार रही।
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जमीन का भाव 1.50 लाख से हुआ 1.50 करोड़ रुपये एकड़
वर्ष 1998 में हथौड़ा-रेती मार्ग पूरी तरह से गैर आबाद था और वहां सिर्फ खेती होती थी। तब जमीन बमुश्किल 25 हजार रुपये बीघा अर्थात 1.50 लाख रुपये एकड़ के भाव थी। दो नदियों के बीच बसे शहर में आबादी बढ़ने पर नगरीय सीमा के बाहरी इलाकों में बसावट शुरू हुई तो इस इलाके में भी तेजी से रिहायशी इलाका आबाद हुआ। नतीजे में जमीन के दाम सौ गुना बढ़कर आसमान छूने लगे। बरेली मोड़ पर नई कॉलोनी बनी तो लोगों ने मान लिया कि अब यह जमीन सरकार नहीं लेगी और इसीलिए वहां पक्के निर्माण होने लगे। अधिसूचित जमीन पर पॉवर कारपोरेशन के एक अधिकारी ने अपनी कोठी बना ली। इसी जमीन के एक भूखंड पर भाजपा का आलीशान कार्यालय बनकर तैयार हो चुका है और अब प्लास्टर का काम हो रहा है।
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विभिन्न गांवों की अधिसूचित जमीन (हेक्टेयर में): एक नजर
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ग्राम पंचायत अधिसूचित जमीन
0 लौका 3.135
0 रसूलपुर जहानगंज 6.520
0 हथौड़ा बुजुर्ग 15.120
0 अहमदपुर नियाजपुर 4.026
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यह निर्णय सरकार अथवा शासन स्तर से होना है कि अधिसूचित जमीनों पर कॉलोनी बनेगी अथवा नहीं। अभी इस बारे में शासन अथवा आवास विकास परिषद से कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। किसानों को जमीन लौटाने का आदेश मिलने पर तत्काल उचित काररछ़वाई शुरू की जाएगी।
-नेहा सिंह, अधिशासी अभियंता, आवास विकास परिषद
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