तिलहर(शाहजहांपुर)। आर्य समाज के वेद प्रचार सप्ताह के समापन पर वैदिक विद्वानों व प्रचारकों को शाल ओढ़ाकर, सत्यार्थ प्रकाश और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने लोगों से वेद मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
समापन दिवस पर आचार्य चंदन मित्र ने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को प्रतिदिन पंच महायज्ञ अवश्य करना चाहिए। यज्ञ का मानव के जीवन में बहुत बड़ा महत्व है। हमारे ऋषि, मुनियों और महापुरुषों का जीवन यज्ञमय था, इसीलिए वह महान कहलाए।
चंदन मित्र ने ब्रह्मयज्ञ, देवयज्ञ, पितृयज्ञ अतिथि यज्ञ व बलि वैश्यदेव यज्ञ के बारे में विस्तार से समझाते हुए सभी श्रद्धालुओं से प्रतिदिन इन पंच यज्ञों को किए जाने को कहा। उन्होंने कहा जो मनुष्य इन पंच यज्ञों को प्रतिदिन करता है उसका घर स्वर्ग के समान है। गुरुकुल रुद्रपुर की प्राचार्य डॉक्टर धारणा ने कहा कि आर्य समाज कोई मजहब व संप्रदाय नहीं है, बल्कि मानव को मानव बनाने की पाठशाला है। दिल्ली से आई विदुषी सावित्री देवी आर्य ने भजनों के माध्यम से सभी को वेदों की ओर लौटने का आवाहन करते हुए कहा कि वर्तमान समय में पश्चिमी सभ्यता के कारण हमारे परिवार बिगड़ रहे हैं। यदि हमें अपने परिवारों को बचाना है, तो वेद मार्ग को अपनाना होगा। समापन अवसर पर प्राचार्य डॉ. धारणा याज्ञिकी, प्राध्यापक आचार्य चंदन मित्र, भजनोपदेशिका सावित्री आर्या, स्वामी क्षमानंद, स्वामी सुधानंद, ठाकुर कृपाल सिंह आर्य, वानप्रस्थी मेवाराम आर्य, प्रीति आर्य, मीरा आर्य, योगाचार्य रानू परमार्थी सहित अन्य प्रचारकों व वृद्धों का सम्मान किया गया। सभी को शाल ओढ़ाकर, सत्यार्थ प्रकाश पुस्तक व प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।