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अनुबंधित बस की चपेट में आकर शिक्षक की मौत

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फोटो-21,मृतक शिक्षक बैजनाथ शर्मा का फाइल फोटो
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फोटो-22,शाहजहांपुर स्थित जिला अस्पताल मॉरचरी पर मृतक के बेटे ओम शर्मा से जानकारी लेते सब इंस्पेक्टर।

अनुबंधित बस की चपेट में आकर शिक्षक की मौत
पत्नी को साथ लेकर फर्रुखाबाद जाने के लिए कर रहे थे बस का इंतजार
रोडवेज बस स्टैंड परिसर में सुबह हुई घटना, परिजनों में मचा कोहराम

अमर उजाला ब्यूरो
जलालाबाद। रोडवेज बस स्टैंड परिसर में शुक्रवार सुबह अनुबंधित बस की चपेट में आकर प्राइवेट स्कूल के शिक्षक समेत दो लोग घायल हो गए। गंभीर रूप से घायल शिक्षक ने जिला अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं दूसरा घायल व्यक्ति प्राइवेट में मरहम पट्टी कराकर अपने घर चला गया।
नगर के मोहल्ला गांधीनगर निवासी 73 वर्षीय बैजनाथ शर्मा, प्रतापनगर स्थित असंगदेव बाल विद्या पीठ में प्राइवेट तौर पर शिक्षक थे। शुक्रवार सुबह वह अपनी पत्नी प्रेमशीला की दवा लेने के लिए फर्रुखाबाद जाने के लिए घर से निकले थे, पत्नी साथ में थी। सुबह करीब आठ बजे बस स्टैंड परिसर में बस आने का इंतजार करने लगे, इसी दौरान पहले नंबर लगाने के चक्कर में तेज रफ्तार दो अनुबंधित बसें एक साथ रोडवेज में परिसर में दाखिल हुई, चालक की लापरवाही से एक बस की चपेट में वहां खड़े बैजनाथ व एक अन्य यात्री आ गया, जबकि प्रेमशीला बाल-बाल बच गईं। बताते है कि इस हादसे में बैजनाथ के शरीर का पूरा दाहिना हिस्सा बुरी तरह कुचल गया। उन्हें तुरंत सीएचसी ले जाया गया लेकिन गंभीर हालत के चलते डॉक्टरों ने उन्हें जिला अस्पताल भेज दिया, जहां इलाज के दौरान कुछ देर में उनकी मौत हो गई। बैजनाथ के तीन विवाहित बेटे हैं, जो परिवार के साथ अलग रहते हैं। घटना के बाद से परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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विधवा बेटी का सहारा थे बैजनाथ
उनकी विवाहित बेटी शिल्पी की मौत हो जाने के बाद उसके चार छोटे-छोटे बच्चों के भरण पोषण की जिम्मेदारी बैजनाथ के कंधों पर ही थी। उनकी मौत से शिल्पी और उनके बच्चों का सहारा छिन गया।
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108 पर कॉल के बाद भी नहीं मिली एंबुलेंस
गंभीर रूप से घायल बैजनाथ शर्मा को जिला अस्पताल रेफर कर दिए जाने के बाद परिजन उन्हें वहां ले जाने के लिए काफी देर तक 108 नंबर पर कॉल कर एंबुलेंस का इंतजार करते रहे लेकिन एंबुलेंस नहीं आई। इसके बाद परिजनों ने प्राइवेट वाहन का इंतजाम किया जिसमें काफी देर लग गई। लगातार खून बहने से उनकी हालत बिगड़ती चली गई। परिजनों का कहना था कि यदि एंबुलेंस मुहैया हो जाती तो समय से अस्पताल पहुंचकर इलाज शुरू हो जाता और उनकी जान बच सकती थी।
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