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प्रयोगशाला में ताले, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांच में खेल
निर्माण और प्रांतीय खंड की प्रयोगशाला में मशीनें फांक रहीं धूल
लंबे समय से इस्तेमाल न होने से कई मशीनें जंक लगने से खराब
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर।
प्रदेश सरकार सड़कों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर जरूर है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसे अनदेखा किया जाता रहा है। जिले में लोक निर्माण विभाग की दो शाखाएं प्रांतीय खंड और निर्माण खंड हैं। दोनों के पास सड़कों में इस्तेमाल होने वाली निर्माण सामग्री की जांच के लिए प्रयोगशालाएं हैं, लेकिन यहां निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच नहीं होती। ठेकेदार और अफसर निर्माण सामग्री की गुणवत्ता में खेल करते हैं। इसका नतीजा सड़कें और गलियां बनने के बाद ही टूटने लगती हैं। प्रयोगशालाओं में आधुनिक मशीने धूल फांक रही हैं। औपचारिकता के नाम पर कभी कभार ईंटों की जांच कर ली जाती है।
जिले में करीब 147 किमी नेशनल हाईवे और 214 किलोमीटर स्टेट हाईवे हैं। नेशनल हाईवे का काम नेशनल हाईवे अथारिटी देखती है। जबकि स्टेट हाईवे के निर्माण, मरम्मत आदि काम देखने की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड पर है। लोक निर्माण विभाग की दूसरी शाखा निर्माण खंड पर ग्रामीण संपर्क मार्ग और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के कार्यों की जिम्मदारी है। लोक निर्माण विभाग की दोनों शाखाओं के पास आधुनिक प्रयोगशालाएं हैं। इनमें पत्थर, गिट्टी, मिट्टी, ईंट, कोलतार आदि की जांच के लिए मशीनें भी हैं। स्टेट हाईवे का काम देखने वाले प्रांतीय खंड की प्रयोगशाला में ताला लटका रहता है। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच में खेल होता है। ऐसे में ठेकेदारों को निर्माण सामग्री में खेल की छूट मिल जाती है। हालांकि, निर्माण खंड की प्रयोगशाला कभी-कभार खुलती है। यहां भी निर्माण सामग्री की गुणवत्ता के नाम पर औपचारिकता पूरी की जाती है। ज्यादातर मशीनें लंबे समय से इस्तेमाल न होने की वजह से खराब हो गई हैं। इस संबंध में निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता एचएन चंद्र से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।
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वर्षों से बंद पड़ी पत्थर की गुणवत्ता जांचने की मशीन
निर्माण खंड की प्रयोगशाला में लगी पत्थर की गुणवत्ता जांचने की मशीन ने कभी काम ही नहीं किया। दरअसल, करीब पांच साल पहले प्रयोगशाला में यह मशीन लगाई गई थी। इंजीनियर ने मशीन को पूरी तरह से फिट नहीं किया। विभाग भी लापरवाह बना रहा। ऐसे में अब तक यह मशीन बंद पड़ी है। अधिकारियों का कहना है कि मशीन लगाने वाली कंपनी को पत्र लिखा गया है।
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स्थानीय निकायों में भी हो रहा खेल
सड़कों की गुणवत्ता में खेल की बात करें तो स्थानीय निकाय भी पीछे नहीं हैं। इंटरलॉकिंग सड़कों में घटिया ईटों का इस्तेमाल हो रहा है। यह बात कई बार उजागर हो चुकी है। इसके बावजूद स्थानीय निकाय प्रशासन निर्माण सामग्री की जांच कराना उचित नहीं समझते। अगर जांच कराई भी जाती है तो घटिया क्वालिटी के स्थान पर अच्छी क्वालिटी की निर्माण सामग्री प्रयोगशाला भेज दी जाती है। इसी वजह से नगर पालिका और नगर पंचायतों में बनने वाली सड़कें और गलियां समय से पहले ही टूटने लगती हैं।
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वर्जन-
निर्माण सामग्री के सेंपल जांच के लिए जरूरत के हिसाब से बरेली और लखनऊ की प्रयोगशालाओं को भी भेजे जाते हैं। सड़कों के निर्माण में गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा जाता है। जरूरत के हिसाब से सैंपलों की स्थानीय प्रयोगशाला में भी जांच कराई जाती है।
-ओपी वर्मा, अधिशासी अभियंता लोनिवि प्रांतीय खंड