शाहजहांपुर। मानसून की बरसात पर पांच दिन से थमने से जिले से होकर बहने वाली नदियों में बाढ़ का आसन्न खतरा फिलहाल टल गया है। बैराजों से रिलीज होेने वाली पानी की मात्रा कम होे जाने से गंगा और रामगंगा जैसी प्रमुख नदियों का जल स्तर भी घटने लगा है। हालांकि, अभी नदियों में पानी का बहाव असामान्य बना हुआ है। इसे देखते हुए बाढ़ चौकियों के स्तर से लगातार सतर्कता बरती जा रही है।
बता दें कि गत शुक्रवार को जिले में 13.2 मिमी बरसात रिकार्ड की गई थी। तब से आसमान पर सुबह के वक्त बादलों की घनी परत छाने के बावजूद सूर्योदय के बाद मौसम साफ हो जाने से रिमझिम फुहारें पड़नी बंद होे गई हैं। इससे तापमान में लगातार बढ़ोत्तरी से गर्मी में इजाफा हो रहा है। वातावरण की नमी से सूर्यास्त के बाद गर्मी से राहत मिल रही है, लेकिन दिन में सामान्य जनजीवन को भीषण उमस का सामना करना पड़ रहा है।
बरसात का दौर थमने से नरौरा समेत उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बैराजों से बहाए जा रहे पानी की मात्रा में कमी आ गई है। तीन दिन पहले तक नरौरा बैराज से गंगा में रोजाना औसतन 150 लाख से 1.75 लाख क्यूसेक तक पानी रिलीज होता रहा, लेकिन बुधवार को वहां से पानी का फ्लोे घटकर 86947 क्यूसेक रह गया। इससे गंगा का जल स्तर बदायूं के कछला घाट पर 20 सेमी और जिले के भैंसार बांध ढाई घाट पर दो सेमी कम होे गया है।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष प्र्रभारी/ सिंचाई विभाग के तार बाबू गिरिजा किशोर मिश्र के अनुुसार रामनगर, खो, हरेली और किच्छा बैराज से पानी की मात्रा गत 24 घंटे में बढ़कर 13748 क्यूूसेक हो गई, लेकिन रामगंगा के जल स्तर में गिरावट आगे भी जारी रहने के संकेत हैं। बरेली के चौबारी घाट से लेकर जलालाबाद तक रामगंगा 20 सेमी घटकर 160.24 मीटर पर बह रही है। उन्होंने बताया कि शहर के समीप गर्रा पांच सेमी बढ़कर 145.40 मीटर पर पहुंच गई है। पीलीभीत के ड्यूनी डाम से रिलीज 10780 क्यूसेक पानी से गर्रा और चढ़ सकती है।