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कैबिनेट मंत्री के हस्तक्षेप के बाद केजीएमसी में भर्ती हो सके बच्चे

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जलालाबाद (शाहजहांपुर)। सूबे के कैबिनेट मंत्री व जिला प्रभारी लक्ष्मीनरायण चौधरी के निर्देश पर गांव मनोरथपुर सहसोबारी से बुधवार को केजीएमसी लखनऊ भेजे गए बीमार बच्चों को शुल्क अदा न करने पर अस्पताल प्रशासन ने भर्ती करने से इंकार कर दिया। बच्चों के लौटने की जानकारी पर मंत्री ने आननफानन में सीएमओ समेत अस्पताल प्रशासन को निर्देश देकर बच्चों को दोबारा रास्ते से ही वापस लखनऊ भेजकर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया।
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गांव मनोरथपुर सहसोबारी में रहस्यमय बुखार से आठ बच्चों की मौत हो जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग व जिला प्रशासन के अलावा कैबिनेट मंत्री गांव पहुंचे और मरीजों का हाल लिया। पांच बच्चों की हालत गंभीर पाते हुए उन्हें कैबिनेट मंत्री ने सरकारी एंबुलेंस से तत्काल केजीएमसी लखनऊ भिजवाया। बताते हैं कि रात करीब दो बजे एंबुलेंस ने बीमार बच्चों को केजीएमसी पहुंचा दिया और वह वापस लौट आई। रात में डॉक्टरों ने बच्चों के दो टेस्ट कराए, जिनमें परिजनों के छह सात हजार से ज्यादा रुपये खर्च हो गए इसके बाद उन लोगों से कहा गया कि आगे की जांच व इलाज के लिए उन्हे दस-दस हजार रुपये और जमा करने होंगे। रुपये न होने के कारण वह लोग तड़के बच्चों को लेकर बस से गांव के लिए चल दिए। ग्राम प्रधान सिपाही लाल को जब यह बात पता लगी तो उन्होंने एसडीएम व सीएमओ को इसकी जानकारी दी। इसके बाद दोनों अधिकारियों ने अपने स्तर से केजीएमसी प्रशासन से बात कर उन्हें पूरे मामले से अवगत कराया। उधर, भाजपा नेता मनोज कश्यप ने प्रभारी मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण को केजीएमसी में मरीजों के साथ की गई मनमानी की बात बताई। मंत्री के हस्तक्षेप के बाद केजीएमसी प्रशासन हरकत में आया। जिसके बाद सीएमओ ने यहां से एंबुलेंस व डिप्टी सीएमओ लक्ष्मण सिंह को भेजा और सीतापुर में मिले बीमार बच्चों को पुन: केजीएमसी वापस कराया। एसडीएम सत्यप्रिय सिंह ने एक लेखपाल को भी लखनऊ भेजा है, जो चार पांच दिन वहां रुककर उनकी जांच आदि का काम पूरा करायेगा।
चंदा करके भेजे गए थे बच्चे
प्रभारी मंत्री के निर्देश पर लखनऊ भेजे जा रहे बीमार बच्चों के परिजनों ने बताया कि उन लोगों के पास रुपये नहीं है। इसके बाद ग्राम प्रधान, एसडीएम व अन्य लोगों ने चंदा करके दस हजार रुपये परिजनों को दिए थे। प्रधान आदि ने सोचा कि वहां उन लोगों का इलाज निशुल्क होगा खाने पीने के लिए दस हजार रुपये दे दिए थे, जो वहां दो जांचों में ही खर्च हो गए।
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