शाहजहांपुर। जिला कारागार में पैरवी के अभाव और छोटे मामलों में निरुद्ध बंदियों के लिए लोक अदालत का आयोजन किया गया। चार दिन तक लगातार चली लोक अदालत में बंदियों के केसों पर सुनवाई की गई। इस बीच 18 बंदियों को रिहा करने का आदेश दिया गया।
19 जुलाई को जिला कारागार में आयोजित अदालत में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम ने पांच, 20 को न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय ने पांच, 21 को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट तृतीय ने पांच व शुक्रवार को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने तीन केसों का निस्तारण किया। न्यायिक अधिकारियों ने सुनवाई के दौरान जेल में बिताई गई अवधि की सजा देकर रिहा करने का निर्णय दिया। मजिस्ट्रेट के निर्देश के बाद बंदी रामशंकर, सरवजीत, मेवा, सुखराम, गौरव, नवनीत, हंसराम, आशीष, सूरजपाल, मुश्ताक, पृथ्वीराज, कदीर, दिनेश, रामवीर, अफरोज, विमलेश व दो अन्य को जेल से रिहा कर दिया गया।
जेल अधीक्षक मिजाजी लाल ने बताया कि कारागार में बंद कई बंदी पैरवी अधिवक्ता नियुक्त नहीं करा पाते थे। वहीं, कुछ अपने केस की पैरवी कराकर जमानत पर मंजूर होने के बाद कोई जमानत लेने को तैयार नहीं होता हैं। ऐसे बंदियों के केसों का निस्तारण कराने के लिए चार दिन लोक अदालत लगाई गई, जिससे बंदी जेल से बाहर आकर खुली हवा में सांस ले सकें।