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लोन के नाम पर खाता खुलवाकर करोड़ों उड़ाने वाले पांच शातिर दबोचे

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शाहजहांपुर। लोन देने के नाम पर खाता खुलवाकर करोड़ों रुपये की ठगी की रकम निकालने वाले गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने बिहार व लखीमपुर खीरी के पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। विभिन्न बैंकों के 40 से ज्यादा खातों में एक करोड़ से ज्यादा रकम ट्रांजेक्शन मिला है। ये आरोपी साइबर ठगी के जरिये उड़ाई गई धनराशि को खातों में ट्रांसफर कर एटीएम से निकाल लेते थे।
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थाना रामचंद्र मिशन और चौक कोतवाली में पिछले दिनों साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज की गईं। एसपी एस. आनंद ने गिरोह की गिरफ्तारी के लिए साइबर सेल प्रभारी नीरज यादव को लगाया। नीरज ने बृहस्पतिवार को सदर क्षेत्र की एक धर्मशाला से पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। एसपी ने बताया कि पुलिस ने बिहार के नालंदा जिले के थाना अस्थमा के ग्राम लखनूबीघा निवासी गौतम कुमार, गांव नौवा निवासी सचिन कुमार, लखीमपुर खीरी के थाना पसगवां निवासी जेबीगंज स्टेशन रोड निवासी पवन मिश्रा, इसी क्षेत्र के ग्राम कुइयाखेड़ा के बालिस्टर सिंह और राजेश को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपियों ने साइबर ठगी की घटनाओं को स्वीकार किया। पुलिस ने आरोपियों के पास से दस एटीएम, चार पासबुक, दो चेकबुक, दो जाली आधार कार्ड बरामद किए हैं।
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बिहार से शुरू हुआ खेल, यूपी में ग्रामीणों को फंसाते थे
गिरोह का संचालन बिहार के नालंदा से होता था। एसपी ने बताया कि नालंदा बिहार निवासी अरविंद व विकास ने खातों का इंतजाम करने का काम सचिन व गौतम को दिया था। ये दोनों बिहार से खातों का इंतजाम करने आते थे। पड़ोसी जिले लखीमपुर खीरी के बालिस्टर, राजेश व पवन मिश्रा से दोनों ने संपर्क साधा। उनका सौदा तय हो गया। इसके बाद ये तीनों शाहजहांपुर, लखनऊ व खीरी आदि जिलों में ग्रामीणों को निशाना बनाने लगे।
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लोन देने के नाम पर नया खाता खुलवाते थे, पांच हजार देते थे
पवन, बालिस्टर और राजेश बैंकों के बाहर खड़े होकर जरूरतमंद लोगों को अपने चंगुल में फंसाते थे। लोन देने के नाम पर नया बैंक खाता खुलवानेे के साथ पांच हजार रुपये देते थे। उनसे धोखाधड़ी कर खाताधारक का एटीएम, चेकबुक, पासबुक आदि ले लेते थे। एसपी ने बताया कि खाताधारक से चेकबुक, पासबुक आदि को कोरियर से घर पर पहुंचने की बात कही जाती थी। ये तीनों दस हजार रुपये प्रति खाते में गौतम व पवन को सारा डिटेल बेच देते थे। ये दोनों खातों को बिहार में अरविंद और विकास को 20 से 25 हजार रुपये प्रति खाता बेचते थे।
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पुलिस को चकमा देने के लिए खातों में ट्रांसफर करते थे रुपये
बिहार से ही घटनाओं को अंजाम दिया जाता था। अरविंद और विकास लोगों से धोखाधड़ी कर इंटरनेट व फोन के माध्यम से विभिन्न तरीकों से रुपये उड़ाने के बाद इन खातों में ट्रांसफर करते थे। बैंक अफसरों व पुलिस को चकमा देने के लिहाज से साइबर अपराध से उड़ाए रुपयों को अधिक खातों में थोड़ा-थोड़ा ट्रांसफर कर एटीएम से रुपये निकाल लेते थे।
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खाता खुलवाने वाले पीड़ितों के आधार कार्ड से लेते थे सिम
पुलिस की पड़ताल में सामने आया कि शाहजहांपुर से लेकर बिहार तक साइबर अपराधी चेन के तौर पर काम करते थे। लोगों का खाता खुलवाने के साथ ही उनका आधार कार्ड लेकर उसकी एडिटिंग करने के बाद सिम ले लेते थे। उन्हीं नंबरों को अलग-अलग अकाउंट में अपडेट कर सिम रखते हुए यूपीआई आईडी, पेटीएम, गूगल पे, फोन पे व इंटरनेट बैैकिंग आदि बनाकर रुपयों का ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करते थे।
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