कैंट बोर्ड की मतदाता सूची से काटा गया उपाध्यक्ष का नाम
मुश्किल बढ़ी: पत्नी और बेटे का नाम भी सूची से हटाया
उपाध्यक्ष बोले, साजिश हुई मेरे साक्ष्यों पर नहीं किया विचार
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। छावनी परिषद (कैंट बोर्ड) उपाध्यक्ष अवधेश दीक्षित की मुश्किलें बढने लगी हैं। छावनी परिषद के मुख्य अधिशासी अधिकारी नागेश कुमार पांडेय ने शुक्रवार को अवधेश दीक्षित, उनकी पत्नी निरुणा दीक्षित और बेटे अक्षत दीक्षित के नामों को छावनी परिषद की मतदाता सूची से हटा दिया है। इस आदेश के बाद छावनी परिषद के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बाद अवधेश दीक्षित से उपाध्यक्ष पद की कुर्सी छिनना भी तय माना जा रहा है।
छावनी परिषद के सदस्य आलोक यादव ने छावनी परिषद की मतदाता सूची 2018 में शामिल कुछ नामों को लेकर आपत्ति की थी। कई आरोप लगाए थे। इनमें छावनी परिषद उपाध्यक्ष अवधेश दीक्षित, उनकी पत्नी निरुणा दीक्षित और बेटे अक्षत दीक्षित के नाम भी शामिल थे। जांच-पड़ताल और सुनवाई के बाद छावनी परिषद के सीईओ ने पाया कि अवधेश दीक्षित और उनके परिवार के सदस्यों के नाम गलत तरीके से सूची में शामिल किए गए हैं। इसके अलावा एक अन्य नाम धर्मात्यानंद कुंवर भी सूची से हटाने योग्य पाया गया। सीईओ ने इस संबंध में शुक्रवार को आदेश जारी कर दिया। इसके बाद छावनी परिषद के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
छावनी परिषद उपाध्यक्ष अवधेश दीक्षित का कहना है कि मतदाता सूची में उनका नाम करीब 20 साल से है। यह उनके खिलाफ साजिश की गई है। उन्होंने अपने पक्ष में सभी साक्ष्य रखे, लेकिन बिना उनके पक्ष पर विचार किए आदेश जारी कर दिया गया। वह फिर से अपना पक्ष रखेंगे। जरूरत पडने पर न्याय के लिए कोर्ट जाने में भी उनको गुरेज नहीं होगा। कानूनन अगर कोई व्यक्ति छह माह से किसी इलाके में रहता है तो उसे मतदान का अधिकार होता है, जिस प्रकार से कार्रवाई की गई है वह तानाशाहीपूर्ण है।