शाहजहांपुर। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने कहा कि देेश में जीएसटी लागू होने के साथ प्रदेेश सरकार पड़ोसी राज्यों के सापेक्ष मंडी शुल्क में कमी लाने को गंभीर है। शुक्रवार को दोेपहर विकास भवन सभागार में जीएसटी संबंधी बैठक के दौरान उद्यमियों और व्यापारियों द्वारा गुड्स सर्विस टैक्स की विसंगतियों समेत यह मुद्दा प्रमुखता से उठाए जाने पर प्रभारी मंत्री ने कहा कि मंडी शुल्क की बात दो बार कैबिनेट में उठ चुकी है और इस पर जल्द सकारात्मक निर्णय किया जाएगा।
जीएसटी पर चर्चा के लिए वाणिज्य कर विभाग के अधिकारियों ने बैठक में उद्योगपतियोें समेत विभिन्न व्यापार संगठनों के पदाधिकारियों, टैक्स बार के प्रतिनिधियाें और जन सामान्य के लोगों को आमंत्रित किया था। विषय स्थापना करते हुए वाणिज्य कर विभाग के अपर आयुक्त एके गुप्ता ने कहा कि जीएसटी में राज्य के नौ और केंद्र के आठ टैक्स समाहित कर दिए जाने से प्रदेेश के औद्योगीकरण में निवेश बढ़ने के साथ रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
औद्योगीकरण की बात पर इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष/ इंडियन प्लाईवुड मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने कहा कि अथक प्रयास के बावजूद जीएसटी की विसंगतियां दूर नहीं हो सकीं, लेकिन मंडी टैक्स कम करना प्रदेश सरकार के हाथ में है। उन्होंने सागौन, शीशम जैसी महंगी लकड़ी से तैयार दरवाजों पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाया गया, लेकिन पापुलर से बने बेहद सस्ते दरवाजों पर 28 फीसदी जीएसटी थोप दिया गया, जबकि यह दरवाजे निम्न-मध्य आय वर्ग के परिवारों की जरूरत हैं।
उद्योग व्यापार मंडल मिश्रा गुट के जिलाध्यक्ष कुलदीप सिंह दुआ ने कहा कि जीएसटी का व्यापारियों के स्तर से कभी विरोध नहीं रहा, लेकिन कुछ प्रावधानों में बदलाव किया जाना जरूरी है, जिनमें मंडी टेक्स भी शामिल है। व्यापार मंडल कंछल गुट के जिलाध्यक्ष वेद प्रकाश गुुप्ता ने जीएसटी की तरह मंडी टैक्स में समानता लाने पर जोर दिया।
पश्चिमी व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष उमेश चंद्र पाठक ने कहा कि सरकार इस बात का ध्यान रखे कि वैट जैसी विसंगतियां जीएसटी में नहीं रहें। इसी कड़ी में उद्यमी रामचंद्र सिंघल, राकेश कपूर, किशन अग्रवाल आदि ने टैक्सेशन सिस्टम में सुधार पर जोर दिया। बैठक में मौजूद पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद ने कहा कि जीएसटी एक अच्छी व्यवस्था है, लेकिन सरकार को मंडी शुल्क पर भी पुनर्विचार करना चाहिए।
प्रभारी मंत्री चौधरी ने कहा कि व्यापारियों ने कभी जीएसटी का विरोध नहीं किया और उनकी मांग पर इसे मूर्तरूप दिया गया। इस व्यवस्था में कारोबारी सेक्टर के समय और श्रम की बचत होने के साथ विभिन्न विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों की मनमानी थमेगी। उन्होंने कहा कि जीएसटी काउंसिल की नियमित बैठकों में इसकी कमियों में सुधार की प्रक्रिया जारी रहेगी। जहां तक मंडी शुल्क में कमी की बात है, यह मुद्दा कैबिनेट में दो बार उठ चुका है और जल्द उचित निर्णय होगा।
बैठक में यह सभी रहे शामिल
प्रभारी मंत्री की बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष अजय प्रताप यादव, विधायक मानवेंद्र सिंह व वीर विक्रम सिंह प्रिंस, डीएम नरेंद्र कुमार सिंह, एडीएम वित्त एवं राजस्व सर्वेश कुमार, वाणिज्य कर के अपर आयुक्त एके गुप्ता, संयुक्त आयुक्त रामकुबेर, उपायुक्त रमेश कुमार सिंह वैस व अमित मोहन, भाजपा के जिलाध्यक्ष राकेश मिश्र, उद्यमी कृष्ण कुमार गर्ग, व्यापारी नेता सुनील गुप्ता, मुकेश मोदी, राजेश शुक्ला, नाजिम खां, सुरेंद्र सिंह सेठ आदि मौजूद रहे।