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कार्तिक पूर्णिमा पर नदियों में श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

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शाहजहांपुर। कार्तिक पूर्णिमा पर जिले भर में पवित्र नदियों के तटों पर भी दिन भर श्रद्धालुओं की भीड़ रही। ब्रह्ममुहूर्त से शुरू हुआ स्नान का सिलसिला शाम तक चला। शहर में गर्रा तट पर लगे मेला में जमकर खरीददारी हुई। महिलाओं और बच्चों ने मेला का लुफ्त उठाया। मेला में दिन भर भीड़ रही। ट्रैफिक पुलिस की व्यवस्था न होने की वजह से गर्रा पुल पर कई बार जाम की स्थिति बनी।
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कार्तिक पूर्णिमा समेत अन्य स्नान पर्वों पर पवित्र नदियों में स्नान का काफी महत्व है। शहर से सट कर बहने वाली गर्रा और खन्नौत भी पवित्र नदियां हैं लेकिन दोनों नदियां प्रदूषण क ी शिकार हैं। ऐसे में दिन व दिन इन नदियों में डुबकी लगाने वालों की संख्या कम होती जा रही है। गर्रा के तट पर लगे मेला में तो काफी भीड़ उमड़ी, लेकिन नदी का घाट सूना-सूना दिखा। स्नान करने के लिए ज्यादातर लोग नाव से दूसरी ओर गए। दअरसल, दोनों नदियों में शहर के कई गंदे नाले गिर रहे हैं। इससे दोनों नदियां दुर्दशा का शिकार हैं। कार्तिक पूर्णिमा के मद्देनजर भी नगर निगम ने नदियों के तट पर साफ-सफाई कराने और नालों का बहाव बंद कराना जरूरी नहीं समझा। नदियों को साफ स्वच्छ और पुनर्जीवित करने के सरकार दावे जरूर कर रही है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। शुक्रवार को कार्तिक पूर्णिमा के दिन गर्रा तट पर लोग नदी के गंदे पानी को देखकर डुबकी लगाने से कतराते नजर आए। गर्रा के एक ओर तट का पानी नाले जैसा था। इसमें तमाम अपशिष्ट तैर रहे थे। ऐसे में तमाम लोगों ने नाव से नदी पार कर दूसरे तट पर स्नान किया। कार्तिक पूर्णिमा पर नदी की दुर्दशा देखकर लोग व्यवस्था को भी कोसते दिखे।

भागीरथी तट पर आस्था का सैलाब, उमड़ा
मिर्जापुर/परौर। कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा तट पर शुक्रवार को आस्था का सैलाब उमड़ा। ब्रह्ममुहूर्त से शुरू हुआ गंगा स्नान का सिलसिला शाम तक चलता रहा। ढाई घाट गंगा तट पर कल्पवास के लिए पहुंचे साधु-संतों ने हवन, कीर्तन, भंडारा का आयोजन किया। तमाम गृहस्थ परिवार के साथ गंगा तट पर कल्पवास कर रहे हैं। शाम को गंगा आरती का आयोजन किया गया। गंगा तट रंग-बिरंगी रोशनी में नहाया नजर आया। हालांकि, श्रद्धालुओं को तमाम अव्यवस्थाओं का सामना भी करना पड़ा।
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कार्तिक पूर्णिमा के मुख्य स्नान के दो दिन पहले से ही ढाई घाट मेला में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। शुक्रवार को गंगा की कटरी गुलजार नजर आई। मेला में लगी दुकानों पर भी खूब खरीददारी हुई। महिलाओं ने गृहस्थी का सामान खरीदा तो किसानों ने खेती-किसानी के सामान की खरीददारी की। बच्चों ने खेल-तमाशे और झूलों का आनंद लिया। गंगा स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की और प्रसाद वितरित किया। साधु-संतों के डेरों में चल रहे कीर्तन में भी भक्तों की भीड़ रही। मेला स्थल पर श्रद्धालुओं को तमाम अव्यवस्थाओं का सामना भी करना पड़ा। मेला को लेकर जिला पंचायत की ओर से की गईं तैयारियां और दावे शुक्रवार को भीड़ के सामने धरे के धरे रह गए। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी लंबे-चौड़े दावे किए गए थे। मेला स्थल पर फोर्स नाम मात्र के लिए पहुंचा। हालांकि, मेला स्थल पर किसी स्थान से किसी तरह की अप्रिय घटना की खबर नहीं है। उधर परौर में रामगंगा तट पर दिन भर स्नान का सिलसिला चलता रहा। साधू-संत भी रामगंगा में स्नान के लिए पहुंचे। स्नान करने के बाद श्रद्धालुओं ने दान-पुण्य भी किया। साधु-संतों ने तट पर भजन-कीर्तन का आयोजन किया।
ढाई घाट मेला स्थल पर यातायात व्यवस्था को लेकर ठोस बंदोबस्त न होने की वजह से मेलार्थियों को जाम का सामना करना पड़ा। गंगा तट से करीब दो किलोमीटर तक जाम की वजह से हजारों वाहन घंटों फंसे रहे। तमाम मेलार्थियों ने रोड किनारे वाहन खड़े करके मेला स्थल तक का सफर पैदल पूरा किया। मेला मार्ग में यातायात व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए कहीं पर पुलिस नजर नहीं आई।
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