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दो लाख बाढ़पीड़ित ग्रामीणों को आपदा राहत सहायता की दरकार

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दो लाख बाढ़पीड़ित ग्रामीणों को आपदा राहत सहायता की दरकार
नरौरा से 2.02 लाख क्यूसेक पानी रिलीज, गंगा में बढ़ा उफान
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। गत एक सप्ताह से पहाड़ से लेकर मैदानी क्षेत्रों मेें हुई व्यापक वर्षा के कारण बैराजों से अतिरिक्त पानी की निकासी कम नहीं हो रही और इसी वजह से गंगा-रामगंगा समेत अन्य सहायक नदियों में बाढ़ की स्थिति यथावत बनी हुई है। जलालाबाद, कलान और तिलहर तहसील के करीब एक सौ गांवों में निवास कर रहे लगभग दो लाख लोग बाढ़ की विपदा से प्रत्यक्ष तौर पर प्रभावित हैं। किसान फसलों समेत अपनी जमीनें कटान की भेंट चढ़ने से दुखी हैं तो सैकड़ों परिवारों का रहने-खाने का सहारा छिन चुका है, लेकिन प्रशासन का आपदा राहत अभियान केवल उन्हीं गांवों तक सीमित रह गया है, जहां जन प्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी दौरे पर जा रहे हैं। बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार सोमवार को नरौरा बैराज से गंगा में पानी की मात्रा बढ़कर 2.02 लाख क्यूसेक हो गई है जबकि अन्य बैराजों से रिलीज पानी के कारण गर्रा बीते 24 घंटे में 40 सेमी बढ़ गई है।

गंगा रामगंगा के खादर में कई गांव पानी से घिरे, फसलें हुई नष्ट
रामगंगा के जलस्तर में रविवार शाम से कुछ कमी आई है, जबकि गंगा पूरे वेग के साथ तटवर्ती गांवों को निगलने के लिए लगातार आबादी की ओर बढ़ रही है जिससे गंगा के खादर में बसे लोगों में त्राहि त्राहि मची हुई है। लगभग एक माह से बारिश और बाढ़ का दंश झेल रहे गंगा-रामगंगा की बाढ़ से घिरे ग्राम अतरी निजामपुर, बीघापुर, आजादनगर, इस्लामनगर, कमथरी, चितार आदि गांवों में खाने पीने के लिए त्राहि त्राहि मची हुई है। आने जाने के रास्ते जलमग्न हो जाने से सरकारी सहायता भी कम ही लोगों को मिल पा रही है। साधन विहीन बाढ पीड़ित भूख और प्यास से तड़प रहे हैं।
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घरों में रखा अनाज भीगकर नष्ट, गहराया चारा संकट
गंगा-रामगंगा के खादर में कम लागत से गन्ना, शकरकंद, मेंथा, उड़द, तिल की होने वाली फसलें इस बार बाढ़ और बारिश से डूबकर नष्ट हो गई हैं जिससे घरों में रखा अनाज खराब हो गया और अगली फसल की उम्मीद खत्म हो जाने से किसान बेहद दुखी हैं। बाढ से फसलों के डूबकर नष्ट हो जाने से पशुओं के चारे का भी घोर संकट है। पशुपालक डूबे खेतों में तैरकर किसी तरह पशुओं के चारे की व्यवस्था कर रहे हैं।

पीड़ितों की मदद कर दुआयें ले रहे हैं समाजसेवी
बाढ़ पीड़ितों की दुर्दशा देखकर ग्राम पंचायत पैलानी उत्तर के प्रधान फारूख अली, समाजसेवी रिजवान अहमद और युसुफ अली प्रशासनिक अधिकारियों के साथ अपने स्तर से बाढ़ पीड़ितों की मदद में जुटे हैं। बाढ़ पीड़ित उन्हें दुआयें देते नहीं थक रहे हैं।

बीमार बाढ़ पीड़ितों से स्वास्थ्य विभाग बेखबर
फोटो-37, डॉक्टर को दिखाने के लिए खड़े मरीज
कलान तहसील के बाढ़ से पीड़ित लोग जुकाम, बुखार आदि रोगों से परेशान हैं, लेकिन उनकी तरफ से स्वास्थ्य विभाग बेखबर है। क्षेत्र मेें ऐसा कोई गांव नहीं जहां के लोग बीमारियों की चपेट में नहीं हैं। कई लोग पड़ोसी जनपद बदायूं और फर्रुखाबाद में इलाज करा रहे हैं जबकि अन्य तमाम लोग झोला छाप डॉक्टरों पर निर्भर हैं। कलान स्वास्थ्य केंद्र पर प्रतिदिन 350-400 मरीज आ रहे हैं। सोमवार को अवकाश के दिन स्वास्थ्य केंद्र बंद होने पर भी मरीज जुटने लगे। वहां तैनात दो डॉक्टरों में कोई नहीं होने पर उप स्वास्थ्य केंद्र परौर से आए डॉ. दिनेश चंद्र ने दोपहर तक मरीजों का परीक्षण किया।
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जिओ ट्यूब डूबने से परौर के अस्तित्व को खतरा
परौर समेत मजरा मोहनपुर और बिचपुरी को कटान से बचाने के लिए रामगंगा के किनारे रेत भर कर जिओ ट्यूब लगाए गए थे। छह जिओ ट्यूब रामगंगा में पहले ही समा चुके हैं। तीन जिओ टयूब शेष रह गए थे। इन्ही के सहारे परौर के मजरा बिचपुरी ब मोहनपुर का अस्तित्व बचा रहा, लेकिन एक ट्यूब डूबने के कगार पर पहुंच गया। इस कारण पानी की ठोकर आगे लग कर कटान कर रही है। कटान से मुकेश कश्यप, रामविलास कश्यप, चुन्नी लाल कुशवाहा आदि किसानों के बेशकीमती खेत काटती हुई रामगंगा मोहनपुर की तरफ बढ़ रही है।
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