शाहजहांपुर।
12वीं पंचवर्षीय योजना के तहत केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2011 में लागू की गई राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना को वर्ष 2014 में मोदी सरकार द्वारा नया कलेवर दिए जाने पर भी जिले के तमाम गांवों में बिजली नहीं पहुंच सकी है। दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत 1994 गांवों में अक्तूबर तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित है, लेकिन अभी तक सिर्फ 800 गांव बिजली से रोशन हो सके हैं। योजना में चयनित 60 फीसदी गांवों में दिन ढलते ही अंधेरा पसर जाता है।
केंद्र की पूर्ववर्ती यूपीए-2 सरकार के कार्यकाल में जिले की तत्कालीन 922 ग्राम पंचायतों से संबद्ध 1994 ऐसे मझरे अर्थात राजस्व गांव विद्युतीकरण के लिए चिन्हित किए, जहां आजादी के बाद से अभी तक बिजली नहीं पहुंची। इन गांवों को जगमगाने के लिए यूपीए सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री के नाम से ग्रामीण विद्युतीकरण योजना शुरू की, लेकिन कई व्यवधान के चलते यह काम रफ्तार पकड़ने के बजाय कछुआ चाल से होेता रहा।
190.80 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत
तीन साल बाद मोदी सरकार के सत्ता संभालने पर योजना का नाम भाजपा के संस्थापक सदस्य दीनदयाल से जोड़ दिया गया। यही नहीं, जिले में ग्रामीण विद्युतीकरण के लिए 190.80 करोेड़ का बजट स्वीकृत करके 2055 किमी लाइनें बिछाने का निर्णय लिया गया। यही नहीं, कार्यदायी संस्था के तौर पर दिल्ली की कंपनी आईएलएफएस को नामित किया गया। कार्यदायी संस्था के अभियंताओं ने 31 मार्च तक 676 गावोें में विद्युतीकरण कराया। अप्रैल माह में तकनीकी कारणों से काम में कुछ रुकावट पड़ी और केवल 40 गांव विद्युतीकृत हो सके। गत मई में 84 अन्य गांव विद्युतीकृत होे गए।
पांच माह में शत प्रतिशत लक्ष्य पाना चुनौती
ज्योति योजना में चयनित करीब 60 फीसदी गांवों में बिजली पहुंचाने के लिए सिर्फ पांच माह का समय बचा है। अधिकारी भी मानते हैं कि सीमित अवधि में शत प्रतिशत लक्ष्य पूर्ति किसी चुनौती से कम नहीं, लेकिन यह काम असंभव भी नहीं है। अधीक्षण अभियंता आरके अग्रवाल के अनुसार कार्यदायी संस्था के काम की नियमित मॉनीटरिंग होे रही है। उन्होंने बताया कि आईएलएफएस को अक्तूबर तक विद्युतीकरण पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं।
आजादी के बाद से गांधीनगर में नहीं जला बल्ब
जलालाबाद। केंद्र व प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा की सरकारें गांव-गांव 24 घंटे बिजली मुहैया करा देने का वादा भी कर रही हैं। इसके बावजूद नगर के मोहल्ला गांधीनगर के लोगों को आजादी के बाद से बिजली मुहैया नहीं हो सकी। करीब दो हजार की आबादी वाले इस मोहल्ले के लोगों की परेशानी जानने के उद्देश्य से यह संवाददाता गांधीनगर पहुंचा तो तमाम लोगों की भीड़ लग गई। कोई क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों तो कोई विभाग के लोगों को कोसने लगा। मोहल्ले के दाताराम, मुन्नी देवी, रघुवीर, कमलेश आदि ने बताया कि चुनाव के दौरान वोट मांगने आने वाले नेता आश्वासन दे जाते हैं। हर आदमी बुरी तरह परेशान है और सबसे ज्यादा दिक्कत पढ़ने वाले बच्चों को होती है।
दो सौ मीटर दूर से कराए हैं कनेक्शन
इस मोहल्ले के करीब दो दर्जन परिवार ऐसे हैं जिन्होंने पास के मोहल्ले जमदग्निनगर से बिजली कनेक्शन ले रखा है। जुगाड़ से कराए गए इन कनेक्शनों की खंभे से दूरी करीब दौ सौ मीटर या उससे भी अधिक होने से तार कई जगहों पर नीचे लटक रहे हैं। इससे हादसा होने का आशंका बनी हुई है। विभागीय अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
दो साल पहले मिल सकी रोड लाइट
लोगों की दिक्कतों को देखते करीब दो साल पहले नगर पालिका ने गांधीनगर के मेन रास्ते पर अपने पोल लगवाकर जेनरेटर से बिजली सप्लाई शुरू की। मोहल्ले वालों के अनुसार लाइट कुछ ही क्षेत्र में उपलब्ध है। अक्सर कोई न कोई खराबी होते रहने से अधिकांश लोगों को बिजली व्यवस्था का कोई लाभ नहीं मिल पाता।
गंाधीनगर के लोगों द्वारा की गई शिकायत व उनकी परेशानी को दृष्टिगत रखते हुए विभाग द्वारा वहां शीघ्र ही बिजली उपलब्ध कराने के प्रयास चल रहे हैं। पोल आ भी चुके हैं और बंच केबिल उपलब्ध होते ही वहां बिजली लाइन डालने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
-कुमार विकल, एसडीओ, पॉवर कारपोरेशन