कलाकारों ने नाटकों के माध्यम से सामाजिक व्यवस्था की कोली पोल
शाहजहांपुर। शाहजहांपुर रंग महोत्सव में दूसरे दिन पांच नाटकों का मंचन किया गया। देर रात तक चले नाटकों में कलाकारों ने जहां चुटकुले संवादों से दर्शकों को झकझोरने का काम किया। वहीं हंसी का मौका मिलने पर दर्शकों की तालियां भी खूब बटोरीं। सामाजिक और राजनैतिक व्यवस्था की पोल खोलने में भी कई नाटकों में खोली गई।
दूसरे दिन के नाटकों की शुरुआत रंगमार्च पटना की टीम ने मुंशी प्रेमचंद की कहानी पर आधारित नाटक ‘दिल की रानी’ का मंचन किया। नाटक रूपांतरण निर्देशक मृत्युंजय शर्मा ने अपने ढंग से सामाजिक परिवेश के अनुरूप संशोधित कर किया। मूलरूप से चौदहवीं शताब्दी का यह नाटक शासक तैमूरलंग के जीवन पर आधारित रहा, जिसमें तैमूर के अभिनय में मनोज मानव और हबीबा के अभिनय में नूपुर चक्रवर्ती मुख्य भूमिकाओं में रहे।
इसी तरह दूसरा नाटक अदाकार ग्रुप सहारनपुर ने दूसरा अध्याय के रूप में मंच पर उतारा। अजय शुक्ल के नाटक दूसरा अध्याय का निर्देशन पवन शर्मा ने किया। इसी तरह तीसरी प्रस्तुति के रूप में ड्रामाटर्जी ग्रुप दिल्ली के कलाकारों ने सुनील चौहान के निर्देशन में विभांशु वैभव के नाटक महारथी का मंचन कर छाप छोड़ी। जबकि चौथा नाटक प्रख्यात लेखक एवं नाटककार असगर वजाहत के चर्चित नाटक इन्ना की आवाज दर्शकों को देखने को मिला। इसका मंचन योगेश जलुथरिया के निर्देशन में कर्मा क्रिएशन एंड कल्चर दिल्ली की टीम ने किया। अंतिम प्रस्तुति के रूप में श्रीमंच कोलकाता के कलाकारों ने बंगला नाटक एक्टि ओबस्तोब गोल्पो का मंचन किया। विमल बंदोपाध्याय के नाटक का निर्देशन हेमंत मिश्र ने किया था। हालांकि बंगाली नाटक दर्शकों को भले ही समझ में न आया हो, लेकिन कलाकारों के हावभाव और अभिनय को सभी ने खूब सराहा और तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। व्यवस्था में शिवम श्रीवास्तव, संजीव सोनू, विपिन मौर्य, विनोद दौलताबाद, विकास भारती, ऋषिकांत आदि का योगदान रहा।