जैतीपुर (शाहजहांपुर)।
क्षेत्र के गांव गोगेपुर का शिव मंदिर प्राचीन से ही आस्था और विश्वास का प्रतीक रहा है। सावन में यहां पर दूर दराज व क्षेत्र के लोगों की भारी भीड़ रहती है।
मंदिर के पुजारी बाबा लक्कड़ गिरी महाराज के अनुसार मंदिर करीब चार सौ वर्ष पूर्व बना था। बताते हैं कि इस स्थान पर जब खुदाई व सफाई हो रही थी तब फावड़ा किसी पत्थर से टकराने का अहसास हुआ। जब लोगों ने देखा तो शिवलिंग नजर आया। ध्यान से देखने पर शिवलिंग के ऊपरी भाग में कान, नाक और मुंह आदि दिखाई दिया। नाक पर फावड़ा लगने पर दूध की हल्की धार चलने लगी थी। यह बात दूर दराज व क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई। इसकी सूचना क्षेत्रीय गांव खमरिया के जमीदार ठाकुर थम्मन सिंह को हुई तो उन्होंने अपने पैतृक गांव खमरिया में विशाल मंदिर का निर्माण करा डाला और शिवलिंग को खमरिया ले जाने का फैसला किया। बताते हैं कि पच्चीस फीट खुदाई होने पर जब पानी आने लगा तो थम्मन सिंह ने शिवलिंग को हाथियों से उखाड़ने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।
मंदिर के पुजारी ने बताया शिवजी ने ठाकुर साहब को रात में स्वप्न दिया कि शिवलिंग यहीं लगवा दो, तब उन्होंने गोगेपुर में मंदिर निर्माण कराया और उसमें शिवलिंग की स्थापना की। उन्होंने धर्मशाला के अलावा पुजारियों के लिए कमरे, विशाल यज्ञशाला बनवायी। बारह एकड़ जमीन भी मंदिर के नाम कर दी थी। यहां आधे फाल्गुन को विशाल मेला लगता है। यहां दूर दराज से लोग जलाभिषेक करने आते हैं। क्षेत्र के लोग यहां आकर अपनी मनौती मांगते हैं। उनकी मनोकामना भी पूरी होती है