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कर्ज माफी के चक्कर में ब्याज लगकर बढ़ती चली गई रकम

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खेत बंधक रखकर 1.94 लाख की बनवाई थी लिमिट
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कर्ज माफी के चक्कर में ब्याज लगकर बढ़ती चली गई रकम
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। सिंधौली क्षेत्र के गांव मूर्छा निवासी हरिनंदन प्रसाद दीक्षित ने वर्ष 2015 में सवा तीन एकड़ खेत को बैंक में बंधक रखकर एक लाख 94 हजार की लिमिट बनवाई थी। समय से अदायगी नहीं करने पर बैंक की देय राशि बढ़कर दो लाख 18 हजार 587 हो गई। इस दौरान कर्ज माफी के लिए हरिनंदन ने बैंक से गुहार भी लगाई लेकिन उसका कर्ज माफ नहीं हो पाया। अप्रैल 2015 से मार्च 2018 तक कुल 35 हजार रुपये ही जमा कर पाया। कर्ज माफी के लालच में रकम बढ़ती चली गई।
हरिनंदन ने लिमिट मंजूर होने के बाद पहली बार 16 अप्रैल 2015 को 60 हजार रुपये की रकम निकाली। इसके बाद उसने 22 अप्रैल 2015 को एक लाख 34 हजार रुपये अपने अकाउंट में ट्रांसफर करा लिए। इस तरह उसने लिमिट का पूरा रुपया दो बार में निकाल लिया। समय पर अदायगी नहीं करने पर बैंक ने 13 अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2016 तक ब्याज की रकम 12 हजार 905 लगने पर ऋण के तौर पर ली गई मूल रकम में जुड़कर देय राशि दो लाख छह हजार 905 रुपये हो गई। इसके बाद भी बैंक का अदायगी नहीं करने से बढ़ी हुई दर पर एक अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2017 तक का ब्याज 21 हजार 360 रुपये लगने के बाद देय रकम दो लाख 28 हजार 265 रुपये हो गई। इस देय राशि को चुकता करने के लिए हरिनंदन ने 22 मार्च 2018 को 25 हजार रुपये जमा कर दिए। तब फिर देय रकम दो लाख तीन हजार 265 रह गई। इसके बाद इस देय राशि पर एक अप्रैल 2017 से 30 मार्च 2018 तक का 25 हजार 258 रुपये का ब्याज लगने पर रकम बढ़कर दो लाख 28 हजार 523 रुपये हो गई। इसके बाद हरिनंदन ने 31 मार्च 2018 को दस हजार रुपये जमा किए। इसके बाद रकम दो लाख 18 हजार 523 रह गई। फिर अदायगी नहीं होने पर 31 मार्च 2018 का एक दिन का ब्याज 64 रुपये लगने पर रकम दो लाख 18 हजार 587 रुपये हो गई। इसी रकम को उसे चुकता करना था और बैंक दबाव बना रही थी। वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हरिनंदन की मौत हैंगिंग से बताई गई है।
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बैंक में सवा तीन एकड़ खेत पर कर्ज लिया था। इस लिहाज से वह कर्ज माफी चाह रहे थे। उनके प्रार्थना पत्र पर मैंने दो बार संस्तुति लिखकर उच्चाधिकारियों को भेजी लेकिन इसके बाद भी कर्ज माफ नहीं हो पाया, इसमें मेरा कोई दोष नहीं है।
अभिषेक गुप्ता, प्रबंधक आईडीबीआई बैंक
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