शाहजहांपुर। सेलफोन पर बात करते हुए रेलवे लाइन से सट कर चल रहे बंडा के गांव आलमपुर पिपरिया निवासी 30 वर्षीय अमित कुमार की खन्नौत मोक्षधाम रेलवे फाटक के पास शुक्रवार सुबह 10:30 बजे मालगाड़ी की चपेट में आकर मौत हो गई। मृतक की मां जैतीपुर पीएचसी पर हाउस बिजिटर हैं। घटना के बाद से परिजनों में कोहराम मचा है। शव का पोस्टमार्टम कराया गया है।
अमित कुमार मेहनत मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। वह मंगलवार को आलमपुर पिपरिया स्थित घर से शहर के मोहल्ला बिजलीपुरा स्थित रिश्ते के चाचा झब्बू के पौत्र के नामकरण संस्कार में शामिल होने आया था। बुधवार को दावत में शामिल होने के बाद अमित बृहस्पतिवार को रोजा के मोहल्ला लोधीपुर में साले पिंटू के घर चले गए। शुक्रवार सुबह लगभग नौ बजे साले से यह कहकर निकले कि अब वह अपने घर जा रहे हैं। लोधीपुर से टेंपो पर बैठने के बजाय वह रेल पटरी के किनारे-किनारे से होते हुए रोडवेज बस स्टैंड की ओर चल दिए। वह मोबाइल कान में लगाकर बातें करते हुए डाउन लाइन की पटरी किनारे-किनारे जा रहा था। सुबह लगभग 10:30 बजे वह जैसे ही खन्नौत मोक्षधाम रेलवे फाटक के करीब पहुंचा, तभी पीछे से लखनऊ की ओर से मालगाड़ी आ गई। वह थोड़ा साइड में हटा, लेकिन इसी बीच मालगाड़ी की एक बोगी में खुला गेट उसके सिर से टकरा गया। इतने में वह झटके के साथ वहीं किनारे गड्ढ़े में जा गिरा और उसकी मौत हो गई। फाटक बंद होने की वजह से तमाम लोग खड़े थे, जब उन लोगों ने उसे पटरी किनारे गायब देखा तो पास जाकर देखा तो उसका शव गड्ढ़े में पड़ा था। सूचना पर पहले यूपी 100 की गाड़ी फिर सदर पुलिस पहुंची और उसके पास मिले मोबाइल से कॉल करके उसकी शिनाख्त पुख्ता की। फिर शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया।
हाय! मेरे बच्चों की परवरिश कौन करेगा
पोस्टमार्टम हाउस पर बिलख रही पत्नी ममता का रो-रोकर बुरा हाल था। वह बार-बार अपने बच्चों नौ वर्षीय विवेक, पांच वर्षीय सूरज और दो वर्षीय शिवा को देखकर कह रही थी कि हाय! मेरे इन बच्चों की परवरिश अब कौन करेगा। वहीं अमित की मां रामबेटी अपने दिल में बेटे की मौत के गम को दबाए बहू ममता को दिलासा दे रही थी कि उसके बच्चों की परवरिश वह करेगी।
मोबाइल पर बात करना पड़ा का कारण
पटरी किनारे चलते समय अमित मोबाइल पर किसी से बात कर रहा था। मालगाड़ी आने का अहसास तो हुआ, लेकिन कान में मोबाइल लगाए होने की वजह से उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा कि वह बचने के लिए पटरी से कितनी दूर है। यदि मोबाइल पर वह बात न कर रहा होता तो शायद जान बच जाती।