शाहजहांपुर। सेहरामऊ दक्षिणी क्षेत्र के गांव सरौरा के पास सोमवार देर रात हादसे में मौत का शिकार हुए जगतसेन जाटव को आज मंगलवार को बेटी की लगुन लेकर नाते-रिश्तेदारों के साथ हरदोई जाना था। उनकी मौत की खबर घर आई तो कोहराम मच गया। तिलक की सारी तैयारियां धरी रह र्गइं। खुशी का माहौल गम में बदल गया।
पिपरौला निवासी जगतसेन जाटव दो बेटियों रिंकी और रीता की शादी कर चुके थे। तीसरे नंबर की बेटी प्रियंका की शादी के लिए वह काफी समय से परेशान थे। दो साल पहले पत्नी शकुंतला की कैंसर से मौत ने उनके सामने बच्चों की परवरिश के साथ ही उनके पाथ पीले करने की चिंता को और बढ़ा दिया था। रिश्तेदारों के जरिए उन्होंने बेटी प्रियंका के लिए हरदोई के थाना पचदेवरा क्षेत्र के गांव आनंदखेड़ा में रिश्ता तय कर दिया था। रिश्ता पक्का होने पर 27 जून को तिलक और दो जुलाई को शादी की तारीख निश्चित हो गई। मंगलवार शाम उन्हें 15 वर्षीय बेटे धर्मेद्र और रिश्तदारों के साथ लगुन लेकर आनंदखेड़ा जाना था। मांगलिक कार्यक्रम में वर और वधू पक्ष के ननिहाल वालों का होना जरूरी होता है, इसलिए वह अपनी ससुराल में निमंत्रण देने पहुंचे थे और लौटते समय बड़े दामाद के साथ हादसे का शिकार हो गए। घर में तिलक की तैयारियों को ग्रहण लग गया। खुशी का माहौल पल भर में गम में बदल गया।
...कोई मेरे पापा को लाकर दे दे
पिता जगतसेन की मौत पर यूं तो बेटा धर्मेंद्र, आठ वर्षीय बेटी वर्षा भी बिलख रही थी, लेकिन सबसे ज्यादा बुरा हाल बेटी प्रियंका का था। जिला अस्पताल में मॉरचरी के पास बिलख रही प्रियंका को महिलाएं गले से लगाए दिलासा दे रही थीं, लेकिन वह सिर्फ एक ही बात कहे जा रही थी कि कोई मेरे पापा को लाकर दे दे।
मां के बाद पिता का भी उठ गया साया
दो साल पहले मां शकुंतला की मौत के बाद सोमवार रात हुए हादसे में पिता का भी सिर से साया उठ गया। मात्र डेढ़ बीघा खेत के मालिक रहे जगतसेन बेटी प्रियंका, 15 वर्षीय बेटे धर्मेंद्र और आठ वर्षीय बेटी वर्षा की परवरिश कर रहे थे। पिता की मौत के बाद प्रिंयका की शादी कैसे होगी और उसके भाई-बहन की परवरिश कौन करेगा, यह सवाल लोगों की जुबान पर हैं।