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40 साल पुराने ढर्रें पर हो रही तिलहर में पेयजल सप्लाई

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फोटो-25, तिलहर में बना 680 किलो लीटर क्षमता का ओवरहेड टैंक।

स्लग--- 40 साल पुराने ढर्रें पर हो रही तिलहर में पेयजल सप्लाई

सूरते हाल : एक लाख की आबादी और एक ओवर हेड टैंक
1977 में बना था 680 किलो लीटर का ओवर हैड टैंक

अमर उजाला ब्यूरो
तिलहर।
गर्मी शुरू होने के साथ ही पेयजल किल्लत शुरू हो गई है। नगर में पेयजल सप्लाई अब भी करीब 40 साल पुराने ढर्रे पर हो रही है। एक लाख से ज्यादा आबादी में पेयजल सप्लाई के लिए सिर्फ एक ओवर हैड टैंक है जो पर्याप्त नहीं है।
तिलहर नगर में लोगों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए 1977 में जल संपूर्ति योजना के तहत 680 किलो लीटर के ओवर हैड टैंक का लोकार्पण किया गया था। इसको करीब 40 साल बीत चुके हैं। इस दौरान नगर की आबादी दोगुना से ज्यादा हो चुकी है। पुरानी जर्जर पाइप लाइन के जरिए ही पानी की सप्लाई की जा रही है। हालांकि, कुछ वर्ष के बाद अंबेडकर पार्क और टाउन हॉल ग्राउंड में मोटर पंप लगाकर पेयजल सप्लाई में सुधार की कोशिश की गई, लेकिन ज्यादा असर नहीं दिखा। एक लाख से ज्यादा आबादी वाले नगर में पेयजल सप्लाई के साधन नाकाफी हैं। गौर करने वाली बात यह है कि इन 40 साल के दौरान नगर में कई नए मोहल्ले विकसित हो गए। इनमें नगर पालिका अब तक पाइप लाइन तक नहीं बिछवा सकी है। जलकल विभाग के जेई नितिन सक्सेना का कहना है कि पेयजल योजना के पुनर्गठन की जरूरत है। नगर में करीब 3400 पानी के कनेक्शन हैं। स्टैंड पोस्ट को खत्म कर दिया गया है। जो भी स्टैंड पोस्ट हैं उन पर पानी की टोटी लगाई गई हैं ताकि पानी बर्बाद न हो।
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वर्जन-
पेयजल पुनर्गठन योजना की कार्ययोजना तैयार कराई गई है। नगर के पूर्वी हिस्से में एक ओवर हैड टैंक और एक मोटर पंप का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। आबादी के हिसाब से नगर में पेयजल व्यवस्था के पर्याप्त साधन न होने की बात सही है।
- सर्वेश कुमार कुशवाह, ईओ
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