फोटो-27,गांव जारमानो में बच्चों को पढ़ाती शिक्षामित्र भारती गंगवार
फोटो-28,गांव जारमानो के स्कूल में जमीन पर बैठकर भोजन करते बच्चे
एक शिक्षामित्र पर 126 बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा
प्राइमरी स्कूलों में शिक्षा का बुरा हाल
जमीन पर बैठकर खाना खाते हैं बच्चे
जूनियर स्कूलों में 60 बच्चों पर एक शिक्षक
अमर उजाला ब्यूरो
पुवायां।
प्राइमरी स्कूलों में शिक्षा का हाल बेहद खराब है। यहीं कारण है कि हालात यह हैं कि कक्षा तीन और चार तक के बच्चे अपना नाम तक नहीं लिख पाते हैं। उन्हें हिंदी वर्णमाला तक का ज्ञान नहीं है।
ऐसी ही स्थिति बृहस्पतिवार को गांव जारमानो के प्राथमिक स्कूल में देखने को मिली। यहां 126 बच्चे पंजीकृत हैं। इस स्कूल में शिक्षामित्र भारती गंगवार, प्रीति विष्ट तैनात है। प्रीति आठ जुलाई से स्कूल नहीं आ रही हैं। लिहाजा सभी 126 बच्चों को शिक्षित करने की जिम्मेदारी शिक्षामित्र भारती पर है। इसी परिसर में ही जूनियर हाईस्कूल भी चल रहा है। इसमें 60 बच्चे हैं। इन्हें पढ़ाने की जिम्मेदारी प्रधानध्यापक महेशचंद्र पर है। उनके पास ही प्राइमरी स्कूल का भी चार्ज है।
महेशचंद्र ने बताया कि प्राइमरी स्कूल में कार्यरत शिक्षामित्र प्रीति आठ जुलाई से 25 जुलाई तक मेडिकल और 26 जुलाई से 25 अगस्त तक चाइल्ड केयर लीव पर हैं, लेकिन उपस्थिति रजिस्टर में उनकी लीव दर्ज नहीं की गई है। वर्तमान में अकेली शिक्षामित्र भारती बच्चों को पढ़ा रही हैं। दोनों स्कूल एक ही परिसर में होने के कारण बच्चों का भोजन भी एक ही जगह बनता है। इससे उन्हें खाना मिलने में देरी हो जाती है। बच्चों को जमीन पर बैठकर ही भोजन करना पड़ता है। बृहस्पतिवार को भी बच्चों को देर से खाना मिला।
ये है शिक्षकों की तैनाती का मानक
जूनियर हाईस्कूल के प्रधानाध्यापक महेशचंद्र ने बताया कि नियमानुसार 30 बच्चों पर एक शिक्षक होना चाहिए। सौ छात्र संख्या वाले स्कूल में तीन शिक्षक और एक प्रधानाध्यापक की नियुक्ति का मानक है।
प्रीति विष्ट पहले छह माह के प्रसूति अवकाश पर थीं। अब एक माह की चाइल्ड केयर लीव पर हैं। शिक्षकों की कमी के कारण कुछ स्कूलों में मानक पूरा नहीं हो पा रहा है। बच्चों के जमीन पर बैठाकर खाना खिलाने के मामले में प्रधानाध्यापक से जवाब तलब किया जाएगा।
ओमप्रकाश त्रिवेदी, एनपीआरसी पुवायां