प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में पात्रों के चयन को लेकर हुई घपलेबाजी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। पुवायां तहसील के गांव रसूलपुर बुजुर्ग में ऐसा ही एक मामला सामने आया है। वहां योजना के तहत 13 ऐसे अपात्रों का चयन कर लिया गया, जिनके स्वयं के मकान बने हैं। यही नहीं, इनमें से कईयों ने आवास की पहली किश्त के तौर पर भेजे गए 40-40 हजार रुपये बैंक से निकाल लिए।
एक शिकायत के आधार पर जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक अजय प्रकाश के स्तर से हुई जांच में यह मामला उजागर होने से विभाग में खलबली मची है क्योंकि इसमें ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर के अन्य स्टाफ पर भी कार्रवाई होनी तय है। गांव में जांच कराने पर तात्कालिक तौर पर कोई भी छूटा हुआ आवासहीन नहीं मिला, लेकिन स्थलीय निरीक्षण में ऐसे 13 लाभार्थी पाए गए, जिनके पहले से पक्के मकान खड़े हैं और आर्थिक रूप से भी साधन संपन्न हैं।
परियोजना निदेशक के अनुसार जांच में तीन-चार ऐसे अपात्र भी पाए गए हैं, जिन्होंने पहली किश्त की धनराशि बैंक खातों से आहरित कर ली है। गलत तरीके से आवास आवंटन के लिए एडीओ कोआपरेटिव निरंकार सक्सेना और ग्राम विकास अधिकारी नरेंद्र कुमार सिंह को भी दोषी पाते हुए दोनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि अपात्रों के बैंक खातों से भुगतान पर रोक लगा दी गई है। साथ ही जिन्होंने धनराशि निकाल ली है, उनसे रिकवरी के बीडीओ को निर्देश दिए है।
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बालेमऊ में आवासों की होगी जांच
बंडा ब्लॉक के गांव बालेमऊ में भी कई अपात्रों को आवास योजना का लाभ दिए जाने की शिकायत मिलने पर पीडी अजय प्रकाश ने क्षेत्र के खंड विकास अधिकारी को जांच करने का निर्देश दिया है। बालेमऊ निवासी वीरपाल ने पीडी को प्रार्थना पत्र देकर बताया कि गांव में सात ऐसे लोगों को आवास स्वीकृत किए गए, जिनके दो मंजिल मकान बने हैं। ऐसे अपात्रों के नाम भी दिए हैं।