पहले प्री-मानसून की लेटलतीफी और बाद में मानसून की देरी से परेशान किसानों ने दो दिन में हुई पर्याप्त बारिश का लाभ उठाते हुए धान की रोपाई तेज कर दी है। जिले में विभिन्न श्रेणियों के साढ़े चार लाख किसान गेहूं के बाद धान की फसल लेते हैं। इस बार करीब 2.65 लाख हेक्टेयर रकबा धान से आच्छादित किया जाना है। हालांकि, बड़ी जोत वाले संपन्न किसान निजी बोरिंग से खेतों में पानी भरकर करीब 30 फीसदी रकबा धान से आच्छादित कर चुके हैं, लेकिन अधिसंख्य साधनहीन लघु-सीमांत श्रेणी के किसान रोपाई के लिए मानसूनी बारिश का इंतजार कर रहे थे। कृषि और मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार पिछले 48 घंटे में हुई 165 मिमी बरसात किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
शासन ने एक हेक्टेयर अर्थात ढाई एकड़ जोत वाले किसानों को लघु और दो हेक्टेयर वाले किसानों को सीमांत श्रेेणी में रखा है। पंजाब से विस्थापित होकर जिले में फार्म हाउस बनाने वाले बड़े फार्मरों को अपवाद मानें तो यहां करीब साढ़े तीन लाख लघु-सीमांत श्रेणी के किसान हैं। लघु श्रेणी के हजारों ऐसे किसान भी हैं, जिनके पास बमुश्किल एक एकड़ जमीन है। केवल परिवार के भरण-पोषण खेती पर आश्रित ऐसे किसानों के पास निजी बोरिंग तो होना दूर रहा, उन्हें खाद, बीज आदि के लिए ब्याज पर कर्ज देने वाले सेठ-साहूकारों की मदद लेनी पड़ती है।
यह किसान सिंचाई के लिए पूरी तरह वर्षा पर आश्रित रहते हैं क्योंकि दूसरों की बोरिंग से सिंचाई करने पर उनकी फसल लागत बढ़ती है, लेकिन फसल सीमित होने के कारण उस पर मुनाफा कमाने की कोई गुंजाइश नहीं होती। मार्च के अंत तक गेहूं की कटाई के बाद अप्रैल और मई माह प्री-मानसून की बारिश के इंतजार में निकल गया। एक जून से मानसून सीजन शुरू होने पर भी बारिश नहीं होने से किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए वरुण देवता की मेहरबानी बरसने का इंतजार कर रहे थे। आखिरकार, ऊपर वाले ने गरीब किसानों की करुण पुकार सुन ली।
धान की रोपाई में तेजी, गन्ने को मिली संजीवनी
पुवायां। सोमवार और मंगलवार को हुई बारिश किसानों के लिए वरदान साबित हुई है। बारिश से धान की रोपाई में तेजी आई है तो गन्ने के लिए बारिश संजीवनी की तरह साबित हुई है। एक जुलाई तक पुवायां क्षेत्र में नाममात्र की भी बारिश नहीं हुई थी। खेती में मामले में काफी आगे होने के कारण तमाम बड़े किसानों ने बारिश का इंतजार किए बिना ही धान की रोपाई बढ़े पैमाने पर शुरू करा दी थी। 15 जून से हो रही धान की रोपाई से क्षेत्र में लगभग 60 प्रतिशत रोपाई का काम पूरा हो चुका है, लेकिन छोटे किसान बारिश के इंतजार में धान की रोपाई नहीं कर रहे थे। सोमवार और मंगलवार को बारिश ने धान रोपाई के काम में तेजी ला दी है, हालांकि बारिश बहुत ज्यादा नहीं हुई है लेकिन इससे खेत में लगने वाले पानी पर गहरा प्रभाव पड़ा है। जिस एक बीघा खेत में धान की रोपाई के लिए पानी भरने में पांच से छह घंटे लग रहे थे, वहां अब एक से डेढ़ घंटे में ही मतलब भर का पानी हो जा रहा है। उधर,गन्ने की खेती में भी बारिश से भारी लाभ हुआ है। बारिश से गन्ने की बढ़वार होगी तो सिंचाई का खर्च भी बचेगा। इसके अलावा खरीफ की अन्य फसलें तिल्ली आदि की बुवाई भी तेजी से शुरू हो सकेगी। बारिश से किसान काफी खुश हैं।