हवा हुई योजना: सर्द हवाओं में ठिठुर रहे परिषदीय स्कूलों में जाने वाले बच्चे
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अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। सूबे के मुख्यमंत्री ने कई आकर्षक योजनाएं तो घोषित कर डाली, लेकिन उन्हें अमलीजामा पहनाने की कोई योजना नजर नहीं आ रही है। अब बेसिक स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों को ही लें, तो मुख्यमंत्री ने पाठ्यपुस्तकों के साथ जूते-मोजे और सर्दी से बचाव के लिए स्वेटर देने की घोषणा भी आनन-फानन में कर डाली थी। पाठ्य पुस्तकें तो जैसे-तैसे बंट गईं, लेकिन अब तक बच्चों के पैरों में न तो जूते-मोजे पहुंच सके और सर्दी शुरू होने के बावजूद स्वेटर भी उन्हें नसीब नहीं हो सके हैं।
आधा सत्र बीत जाने के बाद नवंबर से सर्दी भी पड़ने लगी है। स्वेटर के अभाव में ग्रामीण अंचलों के हजारों बच्चे बिना स्वेटर के ही ठिठुरते हुए स्कूलों में पहुंच रहे हैं। बच्चों के अभिभावक इस उम्मीद में बैठे हैं कि आज नहीं तो कल बच्चों को स्वेटर मिल ही जाएंगे, लेकिन सरकार की ओर से कोई सुध नहीं ली जा रही है। मंगलवार से ओसीएफ स्टेडियम में शुरू होने वाली जनपदीय क्रीड़ा प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में ग्रामीण और नगर क्षेत्र के बच्चे बिना स्वेटर के आयोजन स्थल पर पहुंचे। जो बच्चे स्वेटर में थे, उनके भी स्वेटर अच्छी क्वालिटी के नहीं थे।
खास बात यह भी है कि निकट भविष्य में बच्चों को स्वेटर मिलने की कोई उम्मीद भी सरकार की ओर से दिखाई नहीं पड़ रही। क्योंकि सरकार स्वेटर के संबंध में कोई चर्चा भी नहीं कर रही है।
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बच्चों के लिए मिले जूते भी कमरों में बंद
शैक्षिक सत्र का आधे से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन बच्चों को अभी तक जूते-मोजे भी नहीं मिल सके हैं, आधी-अधूरी तैयारियों और पचास नियम-कानून बनाकर धरातल पर योजनाओं को उतारने में समय लग रहा है, यही कारण है कि जिले में बच्चों के लिए लगभग 50 प्रतिशत जूते ही विकास खंडों में पहुंच सके हैं, लेकिन वे भी कमरों में ही बंद हैं।
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स्वेटर वितरण का निर्णय सरकार का है और इस बारे में अभी कोई जानकारी विभाग के पास नहीं है। सभी योजनाएं सरकार के निर्णय पर ही आश्रित रहती हैं। स्वेटर वितरण के लिए प्रक्रिया लंबित है, जिस कंपनी को स्वेटर उपलब्ध कराने का जिम्मा सौंपा गया है, उससे प्राप्त सप्लाई की जांच होती है, ताकि बच्चों को गुणवत्तापरक वस्तुएं उपलब्ध कराई जा सकें। गुणवत्ता परखने के बाद ही स्वेटर मिलने उम्मीद है। स्वेटर मिलने पर बच्चों को तत्काल बांटने की व्यवस्था कर दी जाएगी। डिमांड के हिसाब से बच्चों के लिए जूते भी अभी पूरे नहीं मिल सके हैं। इसलिए नहीं बांटे जा सके। निकाय चुनाव के कारण भी विलंब हुआ है। जितने जूते प्राप्त हुए हैं उनका वितरण पहली दिसंबर के बाद कराया जाएगा।
राकेश कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी