खुटार (शाहजहांपुर)। लकड़ी से भरी ओवरलोड ट्रॉली से टकराकर हाईटेंशन बिजली लाइन का तार टूटकर बाइक पर जा गिरा, जिससे अधेड़ की मौके पर ही मौत हो गई और चारों बच्चे झुलस गए। एक की हालत गंभीर है।
गांव छापाबोझी निवासी सर्वेश कुमार की पांच वर्षीय पुत्री प्रिया उर्फ किंजल और तीन वर्षीय पुत्र प्रांशु खुटार के गोल्डन फ्लावर सीनियर सेकेंडरी स्कूल में कक्षा यूकेजी और एसकेजी के छात्र हैं। सर्वेश के भाई शिवकुमार की पुत्री वर्षा खुटार के ही न्यू लाइट पब्लिक स्कूल में कक्षा एक और उसकी बहन अंशिका कक्षा दो की छात्रा हैं। सर्वेश चारों बच्चों को रोजाना बाइक से स्कूल ले जाते-लाते हैं। बृहस्पतिवार को सर्वेश किसी काम से बाहर गए थे। सर्वेश ने बच्चों को स्कूल से लाने की जिम्मेदारी गांव के ही बाबू खां को सौंपी थी। बाबू खां दोपहर में स्कूल से चारों बच्चों को लेकर बाइक से घर आ रहे थे।
रास्ते में गांव ढकौआ के पास छापाबोझी की ओर से शीश्राम की लकड़ी भरी ओवरलोड ट्रॉली आ रही थी। ट्रॉली में भरी लकड़ी खुटार से छापाबोझी जाने वाली हाईटेंशन लाइन के तार में फंस गई, जिससे तार टूटकर कुछ दूर खड़े बाबू खां के सीने पर जा लगा। करंट से बाबू खां की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बाइक पर बैठी वर्षा, अंशिका, किंजल और प्रांशु करंट की चपेट में आकर झुलस गए। यह देखकर ट्रैक्टर चालक मौके से भाग निकला। बिजली का तार जमीन पर गिरा तो लाइन ट्रिप हो गई।
बाबू खां का शव और झुलसे बच्चे काफी देर तक मौके पर ही पड़े रहे। कच्चा रास्ता होने और आवागमन कम होने के कारण देर तक उधर से कोई नहीं निकला। बाद में गांव के कुछ लोग रास्ते से गुजरे तो हादसे का पता चल सका। गांव में खबर पहुंचते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए। पुलिस को सूचना दी गई। बच्चों को खुटार के सरकारी अस्पताल ले जाया गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर लकड़ी से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली को कब्जे में लिया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। एसओ बिरजाराम ने बताया कि इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
नहीं पूरी हो सकी मंझली पुत्री के निकाह की हसरत
बाबू खां के हैं तीन पुत्रियां, घर में मचा कोहराम
खुटार। गांव छापाबोझी निवासी बाबू खां के कोई पुत्र नहीं था। वह अपनी तीन पुत्रियों को ही अपना पुत्र मानते थे। उनको बेहद प्यार दुलार करते थे। बड़ी पुत्री सरवीन जहां का निकाह हो चुका है, जबकि मंझली पुत्री अवरिना के लिए वह वर की तलाश कर रहे थे। बाबू खां की सर्वेश से गहरी दोस्ती थी। बृहस्पतिवार को भी सर्वेश के बाहर जाने के कारण बाबू खां बच्चों को लेने खुटार गए थे। वापस आते समय करंट लगने से उनकी जान चली गई। बाबू खां की मौत की सूचना घर पहुंची और पत्नी और दो पुत्रियों के करुण क्रंदन से लोगों की आंखें नम हो उठीं। बाबू खां की पत्नी और पुत्रियों के सामने रोजी रोटी का संकट भी खड़ा हो गया है।
पुलिस प्रशासन भी जिम्मेदार
खुटार। बाबू खां की मौत और चार बच्चे के झुलस जाने के लिए पुलिस और प्रशासन भी कम जिम्मेदार नहीं है। रोजाना ही भूसी, गन्ने से भरे ओवरलोड ट्रक और लकड़ी आदि से भरी ओवरलोड ट्रॉली सड़कों पर देखी जा सकती हैं, लेकिन यातायात सप्ताह में बाइक और कार की चेकिंग पर ही ध्यान दिया जाता है। पुलिस के जेब गरम कर ओवरलोड ट्रक, ट्रॉली आसानी से निकलते चले जाते हैं।