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धोखाधड़ी में फंसे पूर्व जिला विकलांग कल्याण अधिकारी समेत छह कर्मचारी

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धोखाधड़ी में फंसे पूर्व जिला विकलांग कल्याण अधिकारी समेत छह कर्मचारी
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0 फर्जी तरीके से सैकड़ों लोगों को विकलांग पेंशन स्वीकृत करने का मामला
0 डीएम के निर्देश पर हुई प्रशासनिक जांच में खुलासा होने पर रिपोर्ट दर्ज
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर।
विकलांग कल्याण विभाग में तैनात रहे अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से मिर्जापुर और कलान ब्लॉक में सैकड़ों अपात्रों को लंबे समय से विकलांग पेंशन आहरित कराई जा रही थी। डीएम अमृत त्रिपाठी के निर्देश पर हुई जांच में करीब 700-800 लोगों को फर्जी तरीके से पेंशन आहरण कराए जाने की पुष्टि होने पर प्रभारी विकलांग कल्याण अधिकारी हरीश कुमार ने तत्कालीन जिला विकलांग कल्याण अधिकारी रंजीत सोनकर और प्रभारी विकलांग कल्याण अधिकारी वीरपाल समेत चार विभागीय लिपिकों के विरुद्ध थाना सदर बाजार कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
गत 15 मई को कलान तहसील में आयोजित समाधान दिवस में जन सुनवाई के दौरान डीएम को शिकायतें मिलीं कि मिर्जापुर और कलान ब्लॉक में ऐसे तमाम लोगों को विकलांग पेंशन स्वीकृत की गई है, जो वास्तव में विकलांग नहीं हैं। डीएम ने इन शिकायतों का संज्ञान लेते हुए जिला स्तरीय अधिकारियों की दो टीमें गठित कर उन्हें जांच के लिए स्टैटिक मजिस्ट्रेट नामित कर दिया। दोनों टीमों ने मिर्जापुर और कलान समेत कांट व मदनापुर ब्लॉक के विभिन्न गांवों में पेंशनरों का सत्यापन किया तो शिकायतें सही पाई गईं।
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जांच में ऐसे कई तथ्य उजागर हुए जो पेंशन में फर्जीवाड़ा की चुगली कर रहे हैं। मसलन, ऐसे तमाम प्रकरण पाए गए, जिनमें पात्र बताए गए लाभार्थी वास्तव में विकलांग नहीं हैं। यही नहीं, तमाम पेंशन लाभार्थी बताए गए पते पर मिले ही नहीं और कई पेंशनरों की काफी समय पहले मृत्यु होने के बावजूद हाल ही में उनके खातों में छह-छह हजार रुपये की धनराशि भेजी जा चुकी है। जांच टीमों से इसी आशय की सत्यापन रिपोर्ट मिलने के बाद प्रभारी विकलांग कल्याण अधिकारी ने डीएम के निर्देश पर विभाग के दोनों तत्कालीन अधिकारियों समेत लिपिक राधेश्याम, राजेश कुमार, अकबर अली और कंप्यूटर ऑपरेटर ललित कुमार उर्फ पंकज के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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दिवंगत रंजीत सोनकर इसलिए बनाए गए आरोपी
पेेंशन में फर्जीवाड़ा प्रकरण का खास पहलू यह है कि दर्ज रिपोर्ट में आरोपी बनाए गए तत्कालीन जिला विकलांग कल्याण अधिकारी रंजीत सोनकर की वर्ष 2016 में यहां तैनाती के दौरान संदिग्ध हालत में मौत हो चुकी है। चूंकि जांच में उनके कार्यकाल से पहले के फर्जी पेंशन मामले पाए गए। इसलिए माना गया कि सोनकर और बाद में उनका कार्यभार लेने वाले तत्कालीन पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी वीरपाल ने सब कुछ जानते हुए भी विभागीय बाबुओं के खिलाफ कार्यवाही न करके उनका बचाव किया। प्रभारी विकलांग कल्याण अधिकारी हरीश कुमार के अनुसार रिपोर्ट दर्ज होने के साथ मामला न्यायिक क्षेत्र में चले जाने से यह बताना संभव नहीं कि फर्जीवाड़ा के कुल कितने केस सामने आए, लेकिन यह तय है कि विभाग के तत्कालीन अधिकारियों ने सतर्कता नहीं बरती। जांच में एक लाभार्थी की मृत्यु छह वर्ष पूर्व बताए जाने के कारण तत्कालीन लिपिक राजेश कुमार, राधेश्याम और कंप्यूटर ऑपरेटर ललित का दोषी माना गया। वर्तमान लिपिक अकबर अली पर सारे तथ्य जानबूझकर अधिकारियों के संज्ञान में नहीं लाने का आरोप है।
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