होली से पहले गन्ना पर्चियाें को लेकर किसानों में आपा-धापी
0 चीनी मिलों को गन्ना सप्लाई कर खेत खाली करने की होड़
0 भुगतान में सुधार के बावजूद मिलें जारी नहीं कर रहीं पर्चियां
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। नगदी फसल में शामिल गन्ना की बुवाई करने वाले किसानों में होली से पहले सप्लाई पर्चियां हासिल कराने को लेकर आपाधापी शुरू हो गई है। उनमें इस बात की होड़ लगी है कि शेष बचा गन्ना किसी तरह मिलों को देकर खेत खाली कर लिए जाएं, जिससे कि त्योहार के खर्चे पूरे हो सकें और खेतों को अगली फसल के लिए तैयार करने को पर्याप्त समय मिल जाए। शासन की सख्ती के चलते गन्ना के बकाया भुगतान की प्रक्रिया में काफी हद तक सुधार हो चुका है, लेकिन पर्चियां मिलने में देरी के लिए सीधे तौर पर मिल प्रबंधनों को जवाबदेह ठहरा रहे हैं।
चालू पेराई सीजन मेें बढ़ा 20 हजार हेक्टेयर गन्ना रकबा
गन्ना विकास विभाग शीघ्र पकने वाली और अधिक चीनी परता देने वाली गन्ना प्रजातियों की बुवाई के प्रति किसानों में लगातार रुझान बढ़ा रहा है। इस कारण गत पेराई सत्र की तुलना में इस वर्ष गन्ना रकबा 62885 हेक्टेयर से बढ़कर 82000 हेक्टेयर हो गया है। इस कारण गन्ना पैदावार 4.25 करोड़ क्विंटल से अधिक होने का अनुमान है। इसमें सहकारी गन्ना समितियों के 1.15 लाख सदस्य किसानों 2.85 करोड़ क्विंटल गन्ना मिलों को सप्लाई होना है। किसानों द्वारा कराए गए सट्टा के अनुरूप उन्हें पर्चियां भी जारी हो चुकी हैं। दिक्कत उन किसानों को महसूस हो रही हैं, जिनकी पर्चियां खत्म होने के बावजूद गन्ना खेत में खड़ा है। ऐसे किसानों को अगली पर्ची के लिए इंतजार करने को कहा जा रहा है और यही उनकी परेशानी का सबब है।
पेराई सीजन के अंत तक मिलें चालू रखने की कवायद
सर्वे के दौरान किसानों का रकबा भी बढ़ाया गया और उसी के अनुरूप सप्लाई कैलेंडर अप्रैल के अंतिम सप्ताह तक का तैयार किया गया है, जिससे कि पेराई सीजन के अंतिम दौर में चीनी मिलों में नो केन की स्थिति पैदा नहीं हो। चूंकि, बीते पेराई सत्रों में पुवायां और तिलहर की सहकारी चीनी मिलों में यह स्थिति पैदा हो चुकी है। इसलिए अतीत से सबक लेते हुए सप्लाई कैलेंडर इस तरह बनाया गया है कि मिलों में मई के प्रथम सप्ताह तक पेराई जारी रहे और उन्हें गन्ना आपूर्ति के लिए गैर जनपदों के मिल क्षेत्रों से गन्ना नहीं मंगाना पड़े। दूसरी ओर निगोही स्थित डालमियां मिल क्षेत्र के किसानों का कहना है कि चीनी मिल अधिकारियों ने रकबा बढ़ाने को प्रोत्साहित करने के बावजूद मिलों की पेराई क्षमता बढ़ाने पर ध्यान नहीं दिया और इसी वजह से पर्चियों के संकट का सामना करना पड़ रहा है।
खेतों में सूख रहा रोजा मिल क्षेत्र का गन्ना
भावलखेड़ा। रोजा चीनी मिल प्रबंधन के अड़ियल रवैये से गन्ना किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि चीनी मिल से किसानों को पर्चियां उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं, जिससे उनका गन्ना खेतों में खड़ा सूख रहा है। गांव कहेलिया निवासी राममूर्ति का कहना है कि उन जैसे तमाम कृषकों को पर्चियां समय पर नहीं दी जा रही हैं। इसकारण अपना गन्ना बिचौलियों के हाथों सस्ते दामों पर बेंचने को मजबूर हो रहे है। किसान मोबीन और हरदयाल ने कहा कि मिल प्रशासन जान-बूझकर पर्चियां उपलब्ध नहीं करा रहा, जिससे कि बिचौलियों को औने-पौने दामों में गन्ना मिल सके और उनसे अतिरिक्त कमाई में हिस्सा मिल सके।
फोटो 39 में।
चीनी मिलें अपनी मांग के अनुरूप पर्चियां जारी करती हैं। सप्लाई टिकट कैलेंडर पूरे पेराई सीजन के लिए बनता है, जिससे कि अंतिम समय तक मिलें चालू हालत में रहें। जिले के किसानों ने होली से पहले गन्ना सप्लाई करने की परिपाटी बना रखी है, लेकिन एक साथ सट्टा के अनुरूप सभी पर्चियां जारी होने पर मिल गेट के तौल कांटों पर जाम लगने के साथ अन्य कई व्यवहारिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। किसान धैर्य बनाए रखें क्योंकि मिलें बंद होने तक किसी भी किसान का गन्ना खेत में नहीं बचेगा।
-ब्रजेश कुमार पटेल, जिला गन्ना अधिकारी