प्लाईवुड एसोसिएशन ने सराहा सरकार का फैसला
शाहजहांपुर। छूट प्रजाति की लकड़ी का इस्तेमाल करने वाले आरा मिल मालिकों और प्लाईवुड फैक्ट्रियों के लाइसेंसों का ऑनलाइन पंजीकरण और नवीनीकरण कराए जाने संबंधी सरकार के फैसले को प्लाईवुड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने सराहनीय कदम बताते हुए कहा कि सरकार के इस नीतिगत निर्णय से मिल मालिकों को वन विभाग के भ्रष्टाचार से पूरी तरह निजात मिल जाएगी। इस बीच, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए यूपी फारेस्ट पोर्टल शनिवार से खुल गया, लेकिन अभी फीस तय नहीं होने से मिल मालिकों में ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है।
जिलेे में विभिन्न उत्पादों के लिए यूकलिप्टस और पॉपलर जैसी छूट प्रजाति की लकड़ी इस्तेमाल करने वाली करीब 90 आरा मिलें, विनियर और प्लाईवुड फैक्ट्रियां हैं। इनका सालाना नवीनीकरण शुल्क 15 हजार रुपये अभी तक ऑफलाइन जमा कराया जाता था। भुगतान कैश में करने की बाध्यता के चलते वन विभाग के अधिकारी अधिक रकम मांगकर उनका शोषण करते थे। यह मुद्दा कई मौकों पर प्लाईवुड निर्माताओं के संगठन ने मुख्यमंत्री समेत शासन के अधिकारियों के समक्ष उठाया था।
एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने बताया कि इस संबंध में गत 25 नवंबर को बरेली में मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ से उनकी लंबी वार्ता हुई। बाद में 14 दिसंबर को लखनऊ में प्रदेश के नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना के प्रयास से एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने वन विभाग के प्रमुख सचिव और अन्य अधिकारियों से वार्ता की। इसी निर्णायक बातचीत के आधार पर गत 20 दिसंबर को राज्य स्तरीय समिति ने आरा मिलों के लाइसेंस पंजीकरण व रिन्यूवल के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय किया।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ. रूपक डे द्वारा विस्तृत आदेश का सर्कुलर जारी होने के बाद वन विभाग ने ऑनलाइन प्रक्रिया पर अमल कके लिए पोर्टल खोल दिया, लेकिन फीस तय होने में थोड़ा वक्त लग सकता है। प्रदेश अध्यक्ष अग्रवाल ने कहा कि आरा मिल मालिक सरकार पर भरोसा रखते हुए पंजीकरण व रजिस्ट्रेशन शुल्क तय होने तक धैर्य बनाए रखें और इसके लिए उन्हें किसी तरह की हड़बड़ाने की जरूरत नहीं है।