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दहेज रूपी धनुष तोड़ने से होगा गरीब कन्याओं का उद्धार

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शाहजहांपुर। कथा व्यास पंडित रामकुमार मिश्र ने कहा कि भगवान राम ने धनुष भंजन कर राजा जनक को चिंता से मुक्त कर दिया। आज के युवाओं को चाहिए कि वे दहेज रूपी धनुष को तोड़कर कन्याओं के माता-पिता की चिंता को दूर करें। वह कटिया टोला स्थित एक धर्मशाला में रामकथा में प्रवचन दे रहे थे।
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कथा व्यास ने कहा कि राजा जनक के प्रण के अनुसार धनुषभंग करने वाले के साथ ही उनकी पुत्री सीता का विवाह होना था। धनुष तोड़ना तो दूर कोई राजा उसे तिलभर हिला तक नहीं सका। ऐसा देख जनक विचलित हो उठे। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि लगता है पृथ्वी वीरों से खाली हो गई है। विश्वामित्र के आदेश से श्रीराम ने धनुष का भंजन कर दिया। सीता ने आकर श्रीराम को वर माला पहना दी। इस तरह जनक चिंतामुक्त हो गए। कथा व्यास ने कहा कि वह धनुष तो टूट गया, लेकिन समाज में जो दहेज रूपी धनुष रखा है, उसके न टूटने से कितने निर्धनों की कन्या कुंवारी हैं। आज हर निर्धन पिता को ऐसे राम की तलाश है, जो बगैर दहेज विवाह कर दहेज का अन्त करे। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे आगे आकर दहेज रूपी धनुष को तोड़ें, ताकि किसी निर्धन की बेटी कुंवारी न रह सके। कथा के अंत में आरती व प्रसाद वितरण हुआ। इस मौके पर राजेंद्र मिश्र, सागर मिश्र, त्रिलोकीनाथ पांडेय, भारत गुप्ता, डॉ. सत्यप्रकाश मिश्र, आशीष गुप्ता, संजय सेठी, उमेश गुप्ता, राधे श्याम सक्सेना आदि मौजूद रहे।
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