शाहजहांपुर। इन्वेस्टर समिट में निवेश करने वाले उद्यमियों की दुश्वारियों भरी राह को आसान करने वाली निजी औद्याेगिक पार्क की योजना 17 महीने के बाद भी फाइलों में कैद पड़ी है। पार्क को विकसित करने के लिए मानक को पूर्ण करने वाली जमीन जनपद में उपलब्ध नहीं हो सकी है। ऐसे में उद्यमियों के हौसले भी जवाब देने लगे हैं।
फरवरी 2023 में निजी औद्योगिक पार्क बनाने के लिए शासन से निर्देश दिए गए थे। पार्क को विकसित करने का उद्देश्य था कि इन्वेस्टर समिट में निवेश करने वालों को उद्योग लगाने के लिए आसानी से जमीन उपलब्ध करा सकें। निजी पार्क के लिए एक ही स्थान पर दस एकड़ जमीन की जरूरत थी। 12 मीटर चौड़ा रास्ता मानक में शामिल था। अधिकारियों के अनुसार, प्रोजेक्ट पर 90 प्रतिशत खर्च सरकार वहन करेगी। शेष धनराशि को प्रोजेक्ट लगाने वाले को खर्च करना पड़ेगा।
योजना का लाभ उठाने के लिए शुरुआत में कई उद्यमी सामने आए। तिलहर में नेशनल हाईवे किनारे बंथरा गांव, जलालाबाद और बंडा में जमीन को देखा गया। कहीं पर मानक पूर्ण करने वाली जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी है। उपयुक्त जमीन नहीं मिलने पर उद्योग केंद्र के पास आए तीन आवेदनों को निरस्त कर दिया गया था। ऐसे में 17 महीने के बाद भी निजी औद्योगिक पार्क को विकसित करने का रास्ता साफ नहीं हो पाया है।
जिगनेरा में एमएसएमई पार्क की प्रक्रिया लंबित
-जिल में पांच हजार करोड़ रुपये का निवेश कर लखनऊ की लेटेस्ट अप्रैल प्लस कंपनी अजीजपुर जिगनेरा गांव में एमएसएमई पार्क बनाने की दिशा में काम कर रही है। यहां पर 18 एकड़ जमीन को देखा गया था। इसमें 19 फैक्टरी लग सकती हैं। इनके लगने से करीब एक हजार लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। प्रोजेक्ट की फाइल प्रशासन के पास पहुंच गई। वहां से अनुमति मिलने का इंतजार है।
औद्योगिक गलियारा का काम नहीं हो सका शुरू
-जलालाबाद से निकलने वाले एक्सप्रेस-वे के नजदीक बनने वाली औद्योगिक गलियारा के लिए 1500 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध हो गई। अभी इस पर काम शुरू नहीं हो सका है। जमीन देने को लेकर कुछ किसानों ने शुरुआत में विरोध किया था। फिर वह मान गए थे। उनके सहमति देने के बाद अधिकांश लोगों ने बैनामे भी कर दिए हैं। तकनीकी कारणों के चलते काम पूर्ण नहीं हो सका है। बजट में घाेषणा होने के बाद कार्य शुरू होने की संभावना है।
फरवरी में निजी पार्क को बनाने की घोषणा की गई थी। मार्च में अलीगढ़ में पहली औद्योगिक पार्क का स्थापना हुई। इसके बनने से एनओसी समेत कई दुश्वारियां खत्म हो जाएगी। पार्क बनाने का एक प्रस्ताव लंबित पड़ा है।
अरुण पांडेय, सहायक विकास प्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र।
निजी औद्योगिक पार्क बनाने के कई मानक हैं। यह सिर्फ मुख्य सड़क वाली जमीन पर पूर्ण हो सकते हैं। सड़क के किनारे वाली जमीन काफी महंगी है। फिर भी कुछ उद्यमी प्रयास में लगे हैं। संभव है कि जल्द औद्योगिक पार्क की सौगात मिल जाएगी।
अशोक अग्रवाल, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष-आईआईए
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अरुण पांडेय। सहायक विकास अधकारी। संवाद