- मोदी राज के तीन वर्ष बाद भी किसान कर्जदार, योगी की घोषणा धरातल पर नहीं उतरी
- सूबे की पहली कैबिनेट बैठक में माफ किए गए थे कृषि ऋण
- बीते वित्त वर्ष से पहले के माफ होंगे 900 करोड़
केंद्र की मोदी सरकार के कार्यकाल के तीन वर्ष बीतने के बाद भी जिले के किसानों को कृषि ऋण की अदायगी में कोई राहत नहीं मिल सकी है। सूबे में योगी की सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट बैठक में किसानों के कर्ज माफी की घोषणा जरूर की गई, लेकिन यह योजना अब तक धरातल पर उतरती नजर नहीं आ रही है। जिले में लघु सीमांत श्रेणी के करीब 1.15 लाख किसान 900 करोड़ रुपये कर्ज माफ होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
वर्ष 2014 में केंद्र की सत्ता संभालने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन सभी किसानों को कृषि ऋण माफी का लाभ देने का लाभ देने की घोषणा की थी, जो अतिवृष्टि और सूखा आदि प्राकृतिक आपदाओं से फसली नुकसान उठा चुके हैं। इन किसानों को सपा राज में आर्थिक सहायता के तौर पर मुआवजा की धनराशि वितरित की गई, लेकिन वह नुकसान की तुलना में अपर्याप्त साबित हुई।
यही वजह रही कि गत फरवरी में हुए विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने यूपी की जन सभाओं में किसानों के कर्ज माफ करने की घोषणा की, तो जनता ने उसे हाथोंहाथ लिया। गत मार्च में हुई योगी मंत्रिमंडल की पहली बैठक में कर्ज माफी की घोषणा को एक लाख रुपये तक की सीमा में बांध दिए जाने पर सरकार को विरोध की राजनीति से भी दो-चार होना पड़ा। इसके बावजूद किसान कर्ज माफ होने की उम्मीद में खामोश रहे और अभी तक सरकार के फैसले पर अमल होने का इंतजार कर रहे हैं।
बता दें कि जिले में कार्यरत 31 बैंकों की करीब 300 शाखाओं से लगभग चार लाख किसानों ने 45 अरब रुपये का कृषि ऋण ले रखा है। इनमें ढाई से पांच एकड़ जोत वाले 3.52 लाख लघु-सीमांत श्रेणी के किसानों पर लगभग 25 अरब रुपये की ऋण देनदारी है। यही नहीं, निर्धारित अवधि में बकाया अदा नहीं करने वाले लगभग 50 हजार किसानों के खाते एनपीए श्रेणी में लाए जा चुके, जबकि ऐसे किसानों पर 380 करोड़ रुपये बकाया है।
सपा सरकार के कार्यकाल में बैंक अधिकारियों ने 8500 से अधिक ऐसे कृषक खातेदार चिह्नित किए, जो ऋण अदायगी में सक्षम होने के बाद लोन नहीं चुका रहे। ऐसे किसानों से राजस्व की वसूली के पैटर्न पर फसली ऋण वसूलने को रिकवरी सर्टीफिकेट जारी करने की तैयारी की गई, लेकिन सरकार ने कर्ज माफी का तोहफा देकर किसानों से आरसी के जरिये वसूली की बला फिलहाल टाल दी है।
बैंक अधिकारियों केे अनुसार जिले में लघु सीमांत श्रेणी के करीब 3.50 लाख किसान हैं, लेकिन सरकार की कर्ज माफी का लाभ फिलहाल उन्हीं किसानों को देय होगा, जिन्होंने गत वर्ष 31 मार्च से पहले फसली ऋण लिए हैं। ऐसे लगभग 1.15 लाख किसान चिह्नित किए गए हैं। अन्य कर्जदार किसानों की ऋण अदायगी के बारे में शासन की गाइड लाइन के अनुरूप कदम उठाया जाएगा।
महाजनों के कर्ज से निजात दिलाने की जरूरत
जिले में बड़ी संख्या में कम जोत वाले ऐसे तमाम किसान हैं, जिन्होंने गांव के आर्थिक रूप से संपन्न किसानों या फिर महाजनों से खेती-किसानी की तात्कालिक जरूरतें पूरी करने के लिए भारी ब्याज पर कर्ज ले रखा है। इस तरह के फाइनेंसर ब्याज समेत मूलधन चुकाने में देरी होने पर चक्रवृद्धि ब्याज वसूल करते हैं। यही नहीं, रकम अदा नहीं कर पाने पर सूदखोर किसानों का मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न करने से भी गुरेज नहीं करते। जिले के प्रमुख उद्योगपति/इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अशोक अग्रवाल का कहना है कि प्रदेश सरकार को ऐसे किसानों को भी कर्ज माफी के दायरे में लाने पर विचार करना चाहिए जो किन्हीं मजबूरियों के चलते सूदखोरों के चंगुल में फंसकर आर्थिक बरबादी का सामना करने को मजबूर हैं।
शासन को भेजा चिह्नित किसानों का विवरण
प्रदेश सरकार की घोषणा के अनुरूप बीते वित्त वर्ष से पहले कृषि ऋण लेने वाले जिन किसानों के एक लाख रुपये तक के कर्ज माफ होने हैं, उनका विवरण बैंक उच्चाधिकारियों समेत शासन को भेजा जा चुका है। इस बारे में केंद्र अथवा राज्य सरकार से गाइड लाइन मिलने का इंतजार किया जा रहा है। सक्षम अधिकारियों के दिशा निर्देश के अनुसार किसानों को कर्ज माफी का लाभ दिया जाएगा।
- वीएम गुप्ता, अग्रणी जिला प्रबंधक, बैंक ऑफ बड़ौदा
किसानों की बात: उन्हीं की जुबानी
इस सरकार में किसानों की परेशानियां और बढ़ गई हैं। कर्ज माफी अभी तक नहीं हो सकी है। गन्ने का भुगतान सरकारी अभी तक नहीं दिला पाई है। बैंक में जमा अपना रुपया ही नहीं निकल पा रहा है। सरकार ने तीन साल में किसान हित में कोई काम नहीं किया है। किसान बेहद परेशान है।
- प्रभजोत सिंह, ग्राम पुनौती, खुटार
केंद्र के बाद प्रदेश में भी भाजपा की सरकार बन गई। केंद्र सरकार ने तीन वर्ष में किसान का कर्ज माफ नहीं किया। प्रदेश सरकार का कर्ज माफी का आदेश अभी तक स्पष्ट नहीं किया गया है। कर्ज माफी छलावा साबित हो रही है। किसान कर्ज के बोझ तले और भी ज्यादा दबा जा रहा है।
- श्यामबाबू शुक्ला, ग्राम सिरखिड़ी, पुवायां