कृषि वैज्ञानिक फसली उत्पादन बढ़ाने के लिए भले ही खेत की मिट्टी की जांच को जरूरी मानते हों, लेकिन किसानों को इसमें कोई खास दिलचस्पी नहीं है। मृदा नमूनों में विभिन्न खनिज तत्वों समेत सूक्ष्म पोषक तत्वों की जांच को मामूली फीस तय है। यह शुल्क देने से बचने को किसान प्रयोगशालाओं तक नमूने नहीं पहुंचा रहे। इसीलिए अब तक 1.10 लाख नमूनों के सापेक्ष बमुश्किल 14 हजार नमूनों की जांच हो सकी। गत वर्ष के नमूनों की जांच को इसमें शामिल कर लिया जाए तो अब तक सिर्फ 47 हजार मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी हो सके हैं।
कृषि वैज्ञानिकों और विभागीय अधिकारियों का मानना है कि खेतों में लगातार एक जैसी फसलें लेने और रकबा के अनुपात में रासायनिक खादों का अंधाधुंध इस्तेमाल करने से कार्बनिक तत्वों की मात्रा घट रही है। वहीं यूरिया की अधिक मात्रा मिट्टी में क्षारीय तत्व बढ़ा रही है। इससे फसलों का औसत उत्पादन कम हो जाता है। खेत की मिट्टी की प्रकृति के अनुसार उर्वरकों के इस्तेमाल से मृदा में विभिन्न तत्व संतुलित रहते हैं। मृदा तत्वों में संतुलन बनाए रखने के लिए मिट्टी की जांच को अनिवार्य माना गया है।
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कई विभागों की मृदा प्रयोगशालाएं जिले में सक्रिय
मिट्टी की जांच के लिए कृषि समेत कई विभागों और संस्थानों की मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं जिले में सक्रिय हैं। कृषि अधिकारियों के अनुसार मुख्यालय पर विभागीय प्रयोगशाला लोधीपुर में स्थापित है जबकि पुवायां, जलालाबाद और तिलहर तहसील में भी यह प्रयोगशालाएं मिट्टी के नमूनों में सिर्फ मेजर तत्वों की जांच कर रही हैं। इसके अतिरिक्त गन्ना शोध परिषद, कृषि विज्ञान केंद्र और तिलहर चीनी मिल में भी स्वॉयल टेस्टिंग यूनिट कार्यरत हैं।
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इसलिए मिट्टी की जांच नहीं करा रहे किसान
कृषि विभाग में जिले के करीब चार लाख किसान पंजीकृत हैं। बीते वित्त वर्ष में शासन ने जिले को 110887 मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी रखने का लक्ष्य दिया। इसके सापेक्ष विभिन्न माध्यमों से प्रचार-प्रसार करके 110800 मृदा नमूने हासिल किए गए, लेकिन जांच सिर्फ 13328 नमूनों की हो सकी। जिला कृषि अधिकारी डीएस चौधरी के अनुसार विभागीय प्रयोगशालाओं में केवल सल्फर, जिंक, फेरस, मैग्नीशियम आदि मेजर तत्वों की जांच हो पाती है। इसके लिए सात से दस रुपये मामूली शुल्क लिया जाता है, परंतु माइक्रो न्यूट्रिएंट्स की जांच के लिए इन नमूनों को बरेली समेत अन्य शहरों की प्रयोगशालाओं में भेजना पड़ता है। उधर, कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. एलबी सिंह के अनुसार सूक्ष्म पोषक तत्वों की प्रति नमूना जांच शुल्क 150 लिए जाते हैं और इसकी रसीद भी किसानों को दी जाती है। किसान यह धनराशि खर्च करने से बचने के लिए नमूने देने में आनाकानी करते हैं।
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मृदा स्वास्थ्य कार्ड को एक दर्जन मानक नियत
अधिकारियों के अनुसार मृदा स्वास्थ्य कार्ड केवल उन्हीं किसानों को जारी करने का प्रावधान है, जो मिट्टी की जांच को नियत 12 मानक पूरे करते हों। इसमें एनपीके, पीएच मान, इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी, मैग्नीशियम, सल्फर, जिंक, फेरस, पॉलीबिडेनिम और सूक्ष्म पोषक तत्वों की जांच शामिल है। माइक्रो न्यूट्रिएंट्स की जांच नहीं हो पाने से किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड भी जारी नहीं हो पाते।
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पोटाश और बोरान तत्व की पाई जा रही कमी
कृषि विज्ञान केंद्र के मृदा परीक्षण प्रयोगशाला प्रभारी डॉ. पुष्पराज सिंह के अनुसार फसलों के लिए टॉनिक का काम करने वाले पोटाश तत्व और अन्य जैविक खादों का किसान बेहद कम इस्तेमाल कर रहे हैं। इसीलिए अधिकांश नमूनों का विश्लेषण करने पर भारी तत्वों में पोटाश समेत नाइट्रोजन की कमी पाई जा रही है। उन्होंने बताया कि माइक्रो न्यूट्रिएंट के कल्चर टेस्ट में बोरान कम पाया जा रहा है। इस वजह से खट्टापन देने वाली सिट्रिस प्रजातियों की फसलों का उत्पादन प्रभावित होता है।