रोसयाबाजार। पौली क्षेत्र में किसान पारंपरिक खेती से अलग हटकर नया जरिया तलाश रहे हैं। इसी क्रम में सरयू नदी के किनारे बसे किसानों ने तरबूज, खरबूज और ककड़ी की खेती करने की ओर रुचि दिखा रहे हैं। नदी के किनारे निवास करने वाले किसानों को सरयू की बाढ़ कभी कभी कहर बन कर टूटती है तो लोग धान की पारंपरिक खेती से हाथ धो बैठते हैं। ऐसे में सूखे दिनों में सरयू का किनारा खेती के दृष्टिकोण से बड़ा ही लाभदायक साबित होता है। इससे किसान खेती करके तरबूज, खरबूज की खेती करके अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
क्षेत्र के पड़रिया निवासी रामपलट ने बताया कि हम लोग तरबूज की खेती करेंगे, जो संभवत: बाढ़ में हुए नुकसान की भरपाई कर देगी। किसान जोखन, बलराम, संजय, खजांची आदि ने बताया कि एक एकड़ खेत में तरबूज की खेती के लिए अच्छी प्रजाति के 300 से 500 ग्राम बीज की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि एक गड्ढे में तकरीबन तीन बीज पड़ता है। 200 ग्राम खाद का प्रयोग एक गड्ढे में किया जाता है।
एक एकड़ खेत में इसकी कीमत तीन हजार के लगभग आती है। जबकि बीज की कीमत भी दो से ढाई हजार रुपये तक आती है। उन्होंने बताया कि तरबूज की खेती में रासायनिक उर्वरक का प्रयोग किया जाता है। हालांकि, यहां के किसानों ने जैविक खादों का प्रयोग करके पौधों को उगाया और जैविक दवाओं का ही छिड़काव करके फसलों को कीड़ों से बचाया। अब वह अच्छा उत्पादन ले रहे हैं।
किसान रामपलट ने बताया कि तरबूज की खेती करने के बाद इसे बाजारों में गिराया जाता है, जो कि आठ से 10 रुपये प्रति किलो तक बिक जाता है। एक एकड़ में लगभग 60 हजार तक का तरबूज हो जाता है। यह खेती केवल चार माह के अंदर ही समाप्त हो जाती है। खेत अपना है तो कुल खर्च बीज, दवा, खाद मजदूरी 20 से 25 हजार तक एक एकड़ में पड़ जाता है। इस प्रकार कम समय में अच्छी पैदावार कर के आय दोगुनी और माली हालत ठीक किया जाता है।