घर के कामकाज की परवाह किए बिना गांव की सरकार चुनने के लिए सभी को बूथों पर पहुुंचने की जल्दी थी। इसमें महिलाएं भी पीछे नहीं रही।
सुबह सात बजे मतदान शुरू होने से पूर्व ही बूथों पर महिलाओं की लंबी कतार दिखने लगी। एक तरफ पुरुष मतदाताओं की लाइन थी तो दूसरी तरफ महिला मतदाता लोकतंत्र के इस पर्व में अपनी जिम्मेदारी निभाती दिखीं।
अंतिम चरण में बुधवार को हैंसरबाजार व पौली विकास खंड में वोट डाले गए।
इस चरण में खास बात यह रही कि सुबह से ठंड का भी असर रहा, फिर भी मतदान शुरू होते ही लंबी कतार लग गई। इनमें पुरुषों के साथ बड़ी संख्या में महिला शामिल रही। इस दौरान कई बूथ ऐसे रहे जहां पर सुबह से ही महिला मतदाताओं की लंबी लाइन लग गई।
परिवार की बुजुर्ग महिला हो या फिर दुल्हन या फिर बेटियां सभी को वोट देने की ललक बूथों तक खींच लाई। गांव की सरकार चुनने की मौका था, ऐसे में कोई इसमें पीछे नहीं रहना चाहता था। जो बहुएं गांव में नहीं थीं और उनका लिस्ट में नाम था, उन्हें गांव में लाने के लिए प्रत्याशियों व समर्थकों ने व्यवस्था कर रखी थी। वह सीधे ससुराल से मतदान केंद्र पहुंची और मतदान किया।
महिलाओं की बूथों पर सुबह से ही बड़ी संख्या में उपस्थिति यह बता रही थी कि गांव की सरकार में एक-एक वोट का कितना महत्व है। अमूमन महिलाएं भोजन बनाने के बाद मतदान के लिए निकलती है, लेकिन इस बार महिलाओं ने पहले मतदान को तबज्जों दी।
मतदान करने के बाद बूथों से बाहर निकलने पर जब उनसे पूछा गया तो अधिकतर ने कहा कि गांव के विकास के लिए पहले मतदान जरूरी समझा। मड़पौना, अतरौला, पारासीर आदि मतदान केंद्रों पर कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। महिलाएं मतदान के लिए लाइन में खड़ी दिखी।
स्थिति यह रही कि दस बजते-बजते अधिकतर मतदाताओं ने वोट डाल दिया था। महिलाओं की भीड़ भी सुबह के दो घंटे ही ज्यादा रही। इसके बाद बूथों पर सन्नाटा दिखने लगा।
महिलाओं ने कहा कि सभी प्रत्याशियों के बारे में पता है। फिर भी घर के मुखिया व अन्य सदस्यों की राय से वोट डाला। दोपहर तक बूथों पर सन्नाटा दिखने लगा था।