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Sant Kabir Nagar News: ब्रिटिश नागरिकता के 13 साल के भीतर खड़ा कर लिया मदरसे का साम्राज्य

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-बिना नक्शा पास कराए ली थी मान्यता, मदरसा ध्वस्तीकरण आदेश के बाद अब मचा हड़कंप
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- मदरसा भवन से सटे दूसरे मदरसे पर भी अब लटकी कार्रवाई की तलवार
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। ब्रिटिश मौलाना शमशुल हुदा खान के खलीलाबाद शहर स्थित गोश्त मंडी रोड के मदरसे के ध्वस्तीकरण के आदेश के बाद अब मदरसा प्रबंध कमेटी में हड़कंप मचा है। मौलाना ने ब्रिटिश नागरिकता के 13 साल के भीतर अपने मदरसे का साम्राज्य स्थापित कर लिया और विनियमित क्षेत्र मगहर के नियत प्राधिकारी से बिना भवन का नक्शा पास कराए ही मदरसे की मान्यता भी ले ली थी।
हालांकि मदरसा सील होने के बाद यहां की छात्राओं को दो अन्य मदरसे में शिफ्ट कर दिया गया है। वहीं सील मदरसा भवन के बगल में छह माह के भीतर नया भवन खड़ा करके 17 माह तक मदरसा अवैध रूप से संचालित करता रहा। इसकी जिम्मेदार अधिकारी द्वारा अंदरखाने वैधता की जांच चल रही है, और नए भवन पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है। नियम के अनुरूप भवन निर्माण न मिलने पर इस पर प्रशासनिक कार्रवाई होने की संभावना व्यक्त किया जा रहा है।
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देवरियालाल गांव निवासी शमशुल हुदा खान ने दिसंबर वर्ष 2013 में ब्रिटेन की नागरिकता हासिल की। 11 नवंबर वर्ष 2013 को कुल्लियातुल बनातिर रजविया एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी व 19 सितंबर वर्ष 2013 को उसने रजा फाउंडेशन का पंजीकरण कराया। प्रबंध कमेटी के ओहदेदारानों में खुद को सरपरस्त बनकर उसने अपने मदरसा के साम्राज्य को खड़ा करने के मनसूबों को परवान देना शुरू कर दिया।
एनजीओ पंजीकरण होने के बाद वह लगातार पाकिस्तान समेत अन्य देशों की यात्रा करके फंड एकत्रित करने लगा। जैसे-जैसे रुपये आने लगे उसने बिना सरकारी अनुमति के खलीलाबाद शहर के मोतीनगर मोहल्ला गोश्त मंडी रोड पर वर्ष 2014 में जमीन खरीदकर मदरसे का निर्माण शुरू कराया। इसके साथ ही उसने 31 मार्च 2017 को अलिया स्तर (कक्षा 1 से 10 तक) की स्थायी मान्यता रजिस्ट्रार मदरसा शिक्षा परिषद के यहां से प्राप्त कर ली।
वर्ष 2014 से वर्ष 2021 तक शिकायत होने से पूर्व उसने विदेशी फंडिंग की मदद से अपने मदरसे का साम्राज्य खड़ा कर लिया। उसे किसी भी अधिकारिक आदेश की परवाह नहीं थी। शिकायत और जांच के बीच में मामला उलझता देखकर वर्ष 2023 में शमशुल हुदा खान प्रबंध कमेटी से हटकर अपने बेटे तौसीफ रजा को मदरसे की कमान पूर्ण रूप से सौंप दी। इधर जांच और डीएम कोर्ट में चले मुकदमे के बीच फरवरी 2024 में डीएम ने ब्रिटिश नागरिकता के बाद खलीलाबाद में खरीदी गई जमीन को राज्य सरकार के खाते में निहित करने का आदेश दिया। इसके बाद उक्त मदरसा भवन को सील कर दिया गया।

विदेशी फंडिंग के साथ ही हवाला के माध्यम से भी आई रकम
फेमा के तहत केस दर्ज होने के बाद कोतवाली पुलिस मामले में अभी विवेचना कर रही है। पुलिस ने 18 बैंक खाते में लगभग एक करोड़ रुपये फ्रीज करवा दिए हैं। साथ ही मौलाना व उसके परिजनों के एसबीआई, एनडीएफसी व बैंक आफ बड़ौदा के विदेशी खातों की जांच की जा रही है। इसके लिए पुलिस की तरफ से बैंक को पत्राचार भी किया गया है। अभी तक पुलिस जांच में तीन बैंक के सात एनआरआई व एनआरओ खाते की जानकारी हुई है। जानकारों के अनुसार काफी रकम हवाला के माध्यम से भी आना बताया जा रहा है। हालांकि यह पुष्टि जांच अधिकारी की तरफ से अभी तक नहीं की गई है।
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एटीएस की जांच रिपोर्ट के बाद प्रशासनिक कार्रवाई में आई तेजी
अक्तूबर 2025 के अंतिम सप्ताह में पूर्व मदरसा सील होने के बाद भी अन्य भवन में मदरसा संचालन की शिकायत होने पर सीओ व एसडीएम ने मामले की जांच शुरू की। इसी बीच एडीजी लॉ एडं ऑर्डर अभिताभ यश ने लखनऊ में प्रेसवार्ता करके पूरे मामले का खुलासाकर दिया। इसके बाद जनपद स्तर पर भी कार्रवाई में तेजी आई और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी प्रवीण कुमार मिश्र ने मौलाना पर फेमा के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई।
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