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Sant Kabir Nagar News: उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर की मंगल कामना

Tue, 28 Oct 2025 11:33 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
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पक्का पोखरा पर अर्घ्य देने की प्रतीक्षा में महिलाएं । संवाद
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संतकबीरनगर। चार दिवसीय छठ महापर्व के अंतिम दिन श्रद्धालुओं ने उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर अपने कठिन व्रत का समापन किया। इस दौरान महिलाओं ने पुत्रों के दीर्घायु के साथ ही साथ सुख और शांति की कामना की। इस दौरान घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। सुबह हुई बारिश के चलते सूर्य के दर्शन नहीं हुए, लेकिन पानी में भीगते हुए श्रद्धालुओं समय देखकर सूर्य को दूध से अर्घ्य दिया।
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चार दिवसीय छठ महापर्व के अंतिम दिन जिले के विभिन्न नदी और घाटों पर भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। मंगलवार की सुबह तीन बजे से ही छठ व्रतियों का नदी घाटों पर आना जाना शुरु हो गया। श्रद्धालु गाजे बाजे के साथ माथे पर डाला रखे हुए निकले। यही नहीं कुछ महिलाएं अपने शरीर से पृथ्वी को मापते हुए नदी घाटों तक पहुंचीं।
स्थिति यह रही कि सुबह पांच बजे तक सभी श्रद्धालु छठ माता की वेदियों पर पूजन करके सूप में पूजा का सामान और दीपक लेकर पानी में उतर गईं। छठ गीतों को गाते हुए महिलाओं और पुरुषों की टोलियां सूर्य के उगने का इंतजार करने लगीं। सूर्योदय के समय सुबह 6 बजकर 9 मिनट पर श्रद्धालु महिलाओं ने भगवान सूर्य को दूध का अर्घ्य देना शुरू कर दिया। इस दौरान भारी संख्या में भीड़ नदी घाटों पर जुटी रहीं।
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खलीलाबाद में सबसे अधिक भीड़ पक्का पोखरा पर रही। यहां पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु जहां पूजा करने के लिए पहुंचे थे। वहीं छठ पूजा को देखने के लिए भी लोगों की भारी भीड़ पहुंची थी।
नगर के सुगर मिल परिसर पोखरा, मां समय जी पोखरा विधियानी, अमृत सरोवर बरई टोला, गोला बाजार का पक्का पोखरा के साथ ही सरैया, मिश्रौलिया, पटखौली, मोहद्दीनपुर, सरौली, गोरखल, गौसपुर, कसैला, डीघा समेत अन्य स्थानों पर भी छठ का पर्व धूमधाम से मनाया गया। यहां पर भी महिलाओं ने उदीयमान सूर्य को नमन किया तथा उनको अर्घ्य दिया। चार दिवसीय छठ महाव्रत के समापन के बाद महिलाओं ने प्रसाद का सेवन करके पारण किया।
व्रती महिलाओं के हाथों लोगों ने लिया प्रसाद : व्रत की समाप्ति के बाद वह लोग जो व्रत नहीं थे उन्होंने भी दूध ले जाकर उसका अर्घ्य दिया। महिलाओं के सूप में लोगों ने दूध की धार गिराई। वहीं व्रती महिलाओं के हाथों से प्रसाद भी लिया। यह सारा प्रसाद व्रती महिलाओं के द्वारा डाला में रखकर घाट पर ले जाया गया था।
डाला लेकर नाचते गाते घाटों पर पहुंचे लोग : छठ के इस महापर्व पर सूर्य को अर्घ्य देने के लिए डाला लेकर नाचते-गाते हुए श्रद्धालु नाचते-गाते हुए नदी घाटों पर पहुंचे। इस दौरान कई लोग बैंड बाजा और डीजे साथ लेकर पहुंचे। आगे-आगे डाला लिए हुए श्रद्धालु चल रहे थे। उनके साथ पीछे-पीछे गीत गाते हुए महिलाओं की टोलियां चल रही थीं। इस दौरान हल्की बारिश भी शुरू हो गई थी। जिसके चलते पूरे जनपद का माहौल भक्तिमय हो गया था। कांचे ही बांस के बहंगिया...बहंगी लचकत जाय : छठ घाटों पर जाते हुए महिलाएं छठ माता के गीतों को गाती हुई चल रही थीं। छठ गीतों में केरवा जे फरेला घबद में...गीत गाकर व्रत की शुरुआत करते हैं। इस गीत ने लोगों के दिलाें में आस्था का संचार किया। वहीं महिलाओं ने कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाय... गीत के जरिए घाट पर जाने वाली परंपरा को सजोया। ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय गीत को गाकर अपने वियोग का प्रदर्शन किया।
छठ माता की मूर्तियों के दर्शन कर झूमे श्रद्धालु : जिले के विभिन्न नदी घाटों पर छठ माता की मूर्ति की स्थापना की गई है। महिलाओं ने छठ माता की मूर्ति का दर्शन किया तथा उनसे आशीर्वाद मांगा। जिला मुख्यालय पर पक्का पोखरा के साथ ही सुगर मिल परिसर में बने पोखरे पर छठ माता की मूर्ति बनाई गई थी। वहीं मगहर, हरिहरपुर, महुली, बेलहरकला, राजघाट, मेंहदावल, बखिरा, लोाहरौली, नाथनगर, काली जगदीशपुर समेत अन्य स्थानों पर स्थापित छठ माता की मूर्तियों के लोगों ने दर्शन किया तथा उनका आशीर्वाद लिया।
गोताखोरों को भी किया गया था तैनात : छठ घाटों पर स्थानीय स्तर पर गोताखोरों की भी तैनाती की गई थी। ऐसा इसलिए किया गया था कि महिलाएं पानी में खड़े होकर सूर्य के डूबने का इंतजार करती हैं। वहीं महिलाओं के साथ छोटे बच्चे भी छठ घाटों पर जाते हैं। इसको ध्यान में रखते हुए गहरे नदी घाटों पर गोताखोर तैनात किए गए थे। वहीं कई स्थानों पर पूजा के दौरान नावों पर भी सुरक्षाकर्मी तैनात रहे।
छठ व्रतियों की सेवा में लगे रहे संघ के लोग व पूजा समितियां : सूर्य को अर्घ्य देने के दौरान नदी व तालाबों के घाटों पर छठ व्रतियों की सेवा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, पूजा समिति सुगर मिल पोखरा, श्याम मंडल तथा अन्य पूजा समितियों के लोग भी लगे रहे। वह व्रती महिलाओं के साथ ही घाट पर आने वाले बच्चों की भी सेवा में लगे रहे। वह उनके लिए व्रत के सामानों के साथ उनके बच्चों की देखभाल भी करते दिखाई दिए। मौके पर चाय पानी के स्टाल भी लगाए गए थे। व्रती महिलाओं को अर्घ्य देने के लिए दूध की भी व्यवस्था कर रहे थे।
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