संतकबीरनगर/धनघटा। फार्मर रजिस्ट्री के लिए किसानों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। स्थिति यह है कि खतौनी और आधार कार्ड में दर्ज नाम में समानता न होने के चलते फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। किसान इसे दुरुस्त कराने के लिए तहसील और लेखपालों का चक्कर लगा रहे हैं।
शासन ने सरकारी लाभकारी योजनाओं के लिए फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य कर दिया है। जिन किसानों की फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है उन किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाएगा। धनघटा में कई किसानों के खतौनी और आधार कार्ड में दर्ज नाम में अंतर है। छपरा मगरवी और चपरा पूर्वी दो गांव ऐसे हैं जहां के अधिकतर किसानों का नाम मालिकान रजिस्टर में दर्ज ही नहीं है। जिसके कारण उनकी खतौनी नहीं निकल पा रही है और वह सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। छपरा मगरवी गांव के किसान रेनू देवी कहना है कि उनके पति की मौत हुए 10 वर्ष हो गए, लेकिन अभी तक कंप्यूटर में खतौनी दर्ज नहीं हुई। जिसके कारण सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
किसान राधेश्याम चौहान का कहना है कि वरासत न होने की वजह से खतौनी में नाम दर्ज नहीं है। वरासत कराने के लिए तहसील का चक्कर लगा रहा हूं, लेकिन अभी तक वरासत नहीं हो पाई। जिसके कारण सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित है। किसान उमेश चंद्र मिश्र का कहना है कि जमीन का बैनामा करवाए हैं। दाखिल खारिज भी हो गया, लेकिन अभी तक कंप्यूटर में नाम दर्ज नहीं हुआ। जिसके कारण खतौनी नहीं निकल पा रही है और सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है।
फूलचंद का कहना है कि मालकिन रजिस्टर में नाम तो दर्ज है लेकिन खतौनी में नाम दर्ज नहीं हो पाया है। जिसके लिए तहसील का चक्कर लगा रहे हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। छपरा मगरवी गांव के प्रधान प्रतिनिधि देवेंद्र यादव का कहना है कि उनके गांव में कंप्यूटरीकृत खतौनी न होने के कारण बड़ी संख्या में किसान सरकारी योजनाओं का लाभ पाने से वंचित हैं।
इस संबंध में तहसीलदार रामजी का कहना है कि वसीयत और वरासत का काम तेजी के साथ किया जा रहा है, जो किसान तहसील या लेखपाल के पास जा रहे हैं उनका काम प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है। दाखिल संबंधी जो भी मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं उन मामलों का निस्तारण नहीं हो पा रहा है।
पिता की हो चुकी है मौत, मांगा आधार कार्ड
मेंहदावल। फार्मर रजिस्ट्री का कार्य तहसील प्रशासन द्वारा कराया जा रहा है। फार्मर रजिस्ट्री की आईडी बनने के बाद उन्हें कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा, लेकिन इसमें कई तरह की परेशानियां किसान और राजस्व कर्मियों के सामने आ रही हैं जिससे लोगों की परेशानी बढ़ रही है।
तहसील क्षेत्र में फार्मर रजिस्ट्री के कार्य में राजस्व कर्मियों से लेकर पूरा तहसील प्रशासन जुटा हुआ है। प्रत्येक किसान का फार्मर रजिस्ट्री होना है। इसी के माध्यम से अब उन्हें कल्याणकारी योजनाओं के साथ ही खाद बीज के साथ ही किसान सम्मान निधि भी प्राप्त होगा। ऐसे में किसान जब फार्मर रजिस्ट्री के लिए कर्मचारियों के पास पहुंच रहे हैं तो आधार कार्ड और खतौनी के नाम में अंतर उनकी परेशानी को बढ़ा रहा है। नायक टोला निवासी जवाहिर प्रसाद ने बताया कि वह फार्मर रजिस्ट्री के लिए हल्का लेखपाल से मिले। जिसमें पिता की मृत्यु काफी पूर्व हो गई थी। फार्मर रजिस्ट्री कर रहे कर्मचारियों ने पिता का आधार कार्ड मांगा जिस समय पिता की मृत्यु हुई उस समय आधार कार्ड बनाने की कोई प्रक्रिया नहीं थी। ऐसे में मृत्यु प्रमाण पत्र की मांग की गई। जो बना नहीं था अब नए सिरे से पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया नगर पंचायत के माध्यम से शुरू किया हूं। मृत्यु प्रमाण पत्र मिलने के बाद ही फार्मर रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूर्ण होगी। नगर पंचायत के बहवोलिया निवासी देव प्रकाश पांडेय ने बताया कि फार्मर रजिस्ट्रेशन का कार्य नहीं हो पाया है। नगर क्षेत्र में न तो राजस्व कर्मी कोई शिविर लगा रहे हैं न ही लोगों को जागरूक करने में कोई रुचि दिखा रहे हैं। जिसके कारण नगर क्षेत्र में फार्मर रजिस्ट्रेशन नहीं हो पा रहा है। वहीं बुधवार को एसडीएम अरुण कुमार ने फार्मर रजिस्ट्री के कार्य में जुटे कर्मचारियों को फार्मर रजिस्ट्री का कार्य 30 अप्रैल तक पूरा करने का सख्त निर्देश जारी किया है। छुट्टी के दिन भी फार्मर रजिस्ट्री का कार्य होगा।
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अभी तक फार्मर रजिस्ट्री का कार्य नहीं हुआ है। फार्मर रजिस्ट्री करने वाली टीम ने गांव में शिविर नहीं लगाया। न ही किस दिन फार्मर रजिस्ट्री होगा इसकी सूचना गांव के लोगों को दी गई। जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण अभी तक मेरा फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पाया है।
रजावती देवी, पेंडारी खुर्द
गांव में लेखपाल आए फार्मर रजिस्ट्री कराए जाने की सूचना दी। आधार कार्ड आदि एकत्रित कर लिए लेकिन आज तक पता नहीं चल पाया कि फार्मर रजिस्ट्री हुआ की नहीं। जब हल्का लेखपाल से इस संबंध में बात करने का प्रयास किया जाता है तो वह स्पष्ट जवाब नहीं देते हैं।
रमावती देवी, दीयावाती
फार्मर रजिस्ट्री नहीं हुई तो शासकीय योजनाओं के लाभ से होंगे वंचित
महुली। बीडीओ नाथनगर कुलदीप कुमार ने बृहस्पतिवार को किसानों की फार्मर रजिस्ट्री कार्य का जायजा लिया। सिक्टहा में आयोजित चौपाल में फार्मर रजिस्ट्री करने में लापरवाही बरतने वाले कर्मियों को कार्रवाई के लिए तैयार रहने की चेतावनी दिया। साथ ही फार्मर रजिस्ट्री कराने से वंचित किसानों को सभी शासकीय योजनाओं से वंचित हो जाने के प्रति भी आगाह किया।
बीडीओ क्षेत्र के लगभग दर्जन भर ग्राम पंचायतों का दौरा किया। गांवों में चल रहे फार्मर रजिस्ट्री अभियान की प्रगति भी जानी। उन्होंने इस अभियान में लगे कर्मियों को हर हाल में 30 अप्रैल से पहले शत प्रतिशत कार्य पूरा कर लिए जाने का कड़ा निर्देश दिया। बीडीओ ने रतनपुर, हरपुर, घोरहट, बेलराई आदि गांवों में पहुंचकर अभियान की प्रगति का जायजा लेने के साथ ही कार्य में और तेजी लाए जाने का निर्देश दिया। बाद में सिक्टहा में स्थित पंचायत भवन पर कर्मचारियों और किसानों के साथ चौपाल भी लगाई। बीडीओ ने कहा कि फार्मर रजिस्ट्री कराने में लेखपाल, पंचायत सहायक के साथ ही पंचायत सचिव की भी भूमिका महत्वपूर्ण है। सभी को एक इकाई के रूप में युद्ध स्तर पर लग कर इस अभियान को शत प्रतिशत सफल बनाना होगा। कुछ किसानों ने राजस्व अभिलेख और आधार कार्ड में नाम में भिन्नता की समस्या उठाई तो बीडीओ ने उच्चाधिकारियों को अवगत कराने का आश्वासन दिया।