- फर्जी तरीके से हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट मिलने पर सतर्कता शुरू
- यातायात और परिवहन विभाग की ओर से शुरू होगी संयुक्त जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। बस्ती समेत अन्य जनपदों में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट (एचएसआरपी) के फर्जी मिलने के बाद परिवहन और यातायात विभाग ने सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। अधिकारी अब हाई सिक्याेरिटी नंबर प्लेट की जांच बारकोड से करेंगे, ताकि फर्जी होने पर उसको पकड़ा जा सके।
परिवहन विभाग की जांच में लखनऊ, सीतापुर, बस्ती व आगरा में फर्जी तरीके से हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट बनाने का खुलासा हुआ है। इन जनपदों में फुटपाथ की दुकानों पर नंबर प्लेट बनाए जाने का मामला पाया गया है।
सरकार ने एक अप्रैल 2019 के पहले खरीदे गए वाहनों पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट अनिवार्य कर दिया है। नए वाहन खरीदने पर तो कंपनी के अधिकृत डीलर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट बनवाकर लगा रहे हैं, लेकिन पुराने वाहनों पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के लिए एचएसआरपी की वेबसाइट सियान डाट इन पर ऑनलाइन आवेदन करना पड़ता है। उसके बाद नंबर प्लेट लगाने के लिए डीलर का नाम आएगा। आवेदक डीलर का नाम डालेंगे तो नंबर प्लेट लगाने के लिए तिथि बताई जाएगी। उसके बाद उस तिथि पर डीलर के पास जाकर वाहन में नंबर प्लेट लगवा सकते हैं।
हालांकि, संतकबीरनगर जिले में फर्जी नंबर प्लेट लगाने का कोई मामला अभी तक यातायात और परिवहन विभाग की पकड़ में नहीं आया है। वैसे, परिवहन विभाग के पास हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट की जांच के लिए कोई संसाधन नहीं है। यातायात विभाग वाहनों का ई-चालान करता है। अब परिवहन और यातायात विभाग अभियान चलाकर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट की जांच कराएगा। नंबर प्लेट पर लगे बारकोड को परिवहन विभाग के वेबसाइट पर बने बारकोड में डालने पर पूरा विवरण आ जाएगा। अगर नंबर प्लेट फर्जी होगा तो विवरण नहीं आएगा। इससे फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी।
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जिले में प्रतिदिन रजिस्टर्ड होते है 40 से 50 वाहन
उप संभागीय परिवहन अधिकारी के कार्यालय में प्रतिदिन 40 से 50 वाहन रजिस्टर्ड होते हैं। इन वाहनों को डीलर के वहां से हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के लिए निर्धारित धनराशि जमा करा ली जाती है। उसके बाद आरटीओ से नंबर मिलने के बाद प्लेट बनता है और वाहन स्वामी को डीलर के वहां बुलाकर उसके वाहन में लगा दिया जाता है।
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कैसे कार्य करता है बारकोड
यातायात विभाग की डिवाइस ई-चालान के माध्यम से चलता है, ई चालान में नंबर डालते ही वाहन स्वामी का नाम और पता आ जाता है। जिससे वाहन का चालान यातायात विभाग करता है, परिवहन विभाग अब बार कोड के जरिए वाहनों की जांच करेगा, परिवहन विभाग की बेवसाइट पर लिखे बारकोड में नंबर प्लेट के बारकोड की फोटो खिंचते ही पूरा विवरण दिखने लगेगा। इसमे कब वाहन खरीदा गया और कब रजिस्ट्रेशन हुआ। यह सब बताएगा।
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हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट अधिकृत डीलर के वहां पर ही लगवाया जा सकता है, इसके लिए सियान बेवसाइट ही अधिकृत है। अन्य किसी बेवसाइट पर इस नंबर प्लेट का आवेदन नहीं होता है। हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट की जांच बारकोर्ड के जरिए हो सकती है। जल्द ही इसके लिए अभियान चलाया जाएगा। - प्रियवंदा सिंह, एआरटीओ
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वाहनों की प्रतिदिन जांच होती है। जिन वाहनाें पर तीन सवारी व बिना हेलमेट के होते हैं, उनका चालान किया जाता है। हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट की जांच एआरटीओ के सहयोग से बारकोड के जरिए की जाएगी। हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट गलत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। -परमहंस, यातायात प्रभारी